
मोशी कचरा डिपो हादसा: क्षतिग्रस्त इमारत का खतरनाक हिस्सा हटाने का कार्य तेज, सुरक्षित प्रवेश के बाद ही अंदर जाएंगे एनडीआरएफ के जवान
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । मोशी कचरा डिपो में दुर्घटनाग्रस्त हुई इमारत में फंसे लगभग आठ लोगों तक सुरक्षित पहुंचने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के मार्गदर्शन में युद्धस्तर पर बचाव अभियान जारी है। फिलहाल इमारत के उस हिस्से को नियंत्रित तरीके से हटाया जा रहा है, जिसके कभी भी ढहने की आशंका है। इसके बाद जवानों के सुरक्षित प्रवेश के लिए रास्ता तैयार किया जाएगा।
दुर्घटना में इमारत का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह ढह गया है, जबकि शेष संरचना अत्यंत अस्थिर स्थिति में है। विशेष रूप से भवन की नींव गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरी इमारत की स्थिरता प्रभावित हुई है। इसी वजह से किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचते हुए हर चरण में तकनीकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
एनडीआरएफ की तकनीकी टीम के निर्देशन में ब्रेकर मशीन की सहायता से खतरनाक हिस्से को नियंत्रित ढंग से तोड़ा जा रहा है। इसके बाद जेसीबी, पोकलेन और अन्य भारी मशीनों से मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, खतरनाक भाग हटने के बाद इमारत पर अतिरिक्त दबाव कम होगा और शेष संरचना अधिक स्थिर हो सकेगी।
वर्तमान में इमारत के भीतर जाने का मार्ग अत्यंत संकरा और जोखिमपूर्ण है। ऐसे में जवानों को सीधे अंदर भेजना उनकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए पहले इमारत को यथासंभव स्थिर बनाया जा रहा है, ताकि बचाव दल सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंच सके।
एनडीआरएफ, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका, पीएमआरडीए अग्निशमन दल, पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। घटनास्थल पर आवश्यक मशीनरी, तकनीकी उपकरण और पर्याप्त मानवबल उपलब्ध कराया गया है।
एनडीआरएफ के कमांडेंट प्रवीण धट्ट ने बताया कि फिलहाल प्राथमिकता इमारत के खतरनाक हिस्से को हटाकर उसे अधिक से अधिक स्थिर बनाना है। इसके बाद जवानों के सुरक्षित प्रवेश के लिए रास्ता तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान में किसी भी प्रकार का जोखिम उठाए बिना पूरी सावधानी और सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की जा रही है।
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। वे एनडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, पुलिस प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए तथा आवश्यक मशीनरी, मानवबल और तकनीकी संसाधन तत्काल उपलब्ध कराए जाएं।
डॉ. विजय सूर्यवंशी का बयान
“दुर्घटनाग्रस्त इमारत की स्थिति बेहद अस्थिर है, इसलिए बचाव अभियान पूरी तकनीकी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचना है, लेकिन बिना अतिरिक्त जोखिम लिए हर चरण में संरचनात्मक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। खतरनाक हिस्से को हटाने और इमारत को स्थिर करने का कार्य तेजी से जारी है। इसके बाद एनडीआरएफ के जवान सुरक्षित रूप से अंदर प्रवेश करेंगे। सभी संबंधित एजेंसियां पूर्ण समन्वय और क्षमता के साथ बचाव कार्य में लगी हुई हैं।”


