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आंधी-तूफान भी नहीं तोड़ पाए भरोसा, रीवा की 6 ट्रांसमिशन लाइनें बनी मिसाल 1500 दिन का सफर, शून्य ब्रेकडाउन

आंधी-तूफान भी नहीं तोड़ पाए भरोसा, रीवा की 6 ट्रांसमिशन लाइनें बनी मिसाल 1500 दिन का सफर, शून्य ब्रेकडाउन

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:रीवा,मध्य प्रदेश 

रीवा . प्रदेश शासन के उपक्रम मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की रीवा स्थित 6 महत्वपूर्ण एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों ने विगत चार वर्षों यानी लगभग 1500 दिनों से बिना किसी ब्रेकडाउन के निर्बाध विद्युत पारेषण कर अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। आंधी-तूफान, तेज बारिश, आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक चुनौतियों और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के बावजूद इन लाइनों का सतत एवं विश्वसनीय संचालन जारी है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि रीवा की इन 6 लाइनों सहित प्रदेशभर में एमपी ट्रांसको की कुल 593 ईएचवी ट्रांसमिशन लाइनें भी बीते चार वर्षों से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित होकर प्रदेश की विद्युत पारेषण व्यवस्था की मजबूती और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा अनुरक्षण कार्य में जुटे आउटसोर्स कर्मियों की प्रतिबद्धता, दक्षता और समर्पण का परिणाम है।

 

रीवा क्षेत्र की जिन ट्रांसमिशन लाइनों ने यह उपलब्धि हासिल की है, उनमें 220 केवी वोल्टेज लेवल की दो एवं 132 केवी वोल्टेज लेवल की चार ट्रांसमिशन लाइन शामिल है। इनमें 220 केवी रीवा-सिरमौर, 220 केवी रीवा टोंस हाइडल पावर स्टेशन की लाइनों के अलावा 132 केवी रीवा सिल्परा बाणसागर लाइन के दो सर्किट एवं रीवा जेपी सीमेंट व 132 केवी रीवा रेलवे ट्रैक्सन फीडर की लाइन शामिल है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए थर्मो-विजन निरीक्षण, ड्रोन सर्विलांस, एससीएडीए आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन कंडीशन मॉनिटरिंग तथा समयबद्ध निवारक अनुरक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। नियमित लाइन पेट्रोलिंग, प्री-मानसून मेंटेनेंस, लाइन कॉरिडोर प्रबंधन, पेड़ों की कटाई-छंटाई तथा उपकरणों की सतत निगरानी के माध्यम से संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किया गया, जिससे ब्रेकडाउन की आशंकाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सका और ट्रांसमिशन लाइनों की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

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