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वरिष्ठ लेखिका डॉ. प्रज्ञा दया पवार की अध्यक्षता में पुणे में होगा ‘लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे विचारवेध साहित्य सम्मेलन’

वरिष्ठ लेखिका डॉ. प्रज्ञा दया पवार की अध्यक्षता में पुणे में होगा ‘लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे विचारवेध साहित्य सम्मेलन’

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: पद्मपाणी फाउंडेशन तथा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले ‘लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे विचारवेध साहित्य सम्मेलन’ की अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ लेखिका एवं चिंतक डॉ. प्रज्ञा दया पवार का सर्वसम्मति से चयन किया गया है। आयोजकों के विनम्र आग्रह को स्वीकार करते हुए डॉ. प्रज्ञा दया पवार ने सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए सहर्ष सहमति प्रदान की है। यह जानकारी सम्मेलन की संयोजन समिति के अध्यक्ष राहुल डंबाले ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

 

यह विशेष वैचारिक साहित्य सम्मेलन 16 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे के प्रगतिशील, विद्रोही तथा श्रमिक वर्ग के अधिकारों से जुड़े विचारों को समाज के सामने लाना और उन पर व्यापक चिंतन करना है।

 

संयोजन समिति के अध्यक्ष राहुल डंबाले ने कहा, “लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे का संदेश ‘जग बदल घालूनी घाव, सांगूनी गेले मज भीमराव’ आज भी समाज को नई दिशा देता है। मराठी साहित्य में डॉ. प्रज्ञा दया पवार का योगदान और उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके नेतृत्व से इस वैचारिक सम्मेलन की गरिमा और समृद्धि निश्चित रूप से बढ़ेगी।”

 

सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए संयोजन समिति की सदस्य प्राज्ञ वैशाली देठे, डॉ. राहुल ससाणे, सतीश वाघमारे तथा संतोष मदने विशेष रूप से प्रयासरत हैं।

 

सम्मेलन में विभिन्न वैचारिक सत्रों, परिसंवादों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पुणे शहर और महाराष्ट्र के प्रगतिशील आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता, साहित्यकार, शोधकर्ता तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। आयोजकों ने सभी साहित्यप्रेमियों एवं नागरिकों से सम्मेलन में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

 

सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा दया पवार का परिचय

 

‘लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे विचारवेध साहित्य सम्मेलन’ की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा दया पवार मराठी साहित्य की अग्रणी कवयित्री, उपन्यासकार, ललित लेखिका तथा प्रखर चिंतक के रूप में प्रसिद्ध हैं। दलित, विद्रोही तथा स्त्रीवादी साहित्यिक आंदोलन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

साहित्यिक योगदान:

डॉ. प्रज्ञा पवार ने अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक असमानता, शोषित वर्ग के प्रश्नों तथा महिलाओं के अधिकारों पर निर्भीकता से अपनी बात रखी है। उनके प्रमुख काव्य संग्रह ‘अंतस्थ’, ‘उत्कट शब्दवेध’, ‘मी भिडवू इच्छितेय समोरासमोर डोळे’ और ‘आरपारं’ व्यापक रूप से चर्चित रहे हैं। इसके अलावा ‘धादांत खैरलांजी’ (दीर्घ कविता), ‘केंद्रांकित’ (ललित निबंध संग्रह) तथा ‘मातीचा पोत’ जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

 

पुरस्कार एवं सम्मान:

साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें महाराष्ट्र शासन के ‘कवि केशवसुत पुरस्कार’ सहित अनेक प्रतिष्ठित राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी कई रचनाएँ विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी शामिल हैं।

 

वैचारिक भूमिका:

महाराष्ट्र के प्रगतिशील, आंबेडकरी एवं समतावादी आंदोलनों में डॉ. प्रज्ञा दया पवार की सक्रिय भूमिका रही है। उन्हें इन आंदोलनों की एक सशक्त और विवेकशील आवाज़ के रूप में देखा जाता है। सम्मेलन की अध्यक्ष के रूप में उनका चयन लोकशाहीर अण्णा भाऊ साठे के प्रगतिशील और क्रांतिकारी विचारों को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जा रहा है।

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