
दिव्यांग बच्चों के लिए शीघ्र हस्तक्षेप व समावेशी शिक्षा पर जोर
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,। दिव्यांग बच्चों के शीघ्र निदान, समय पर हस्तक्षेप और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) और दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग की संयुक्त पहल से तैयार ‘क्रॉस डिसएबिलिटी दिव्यांगत्व पाठ्यक्रम आराखड़ा’ पुस्तिका का लोकार्पण यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में किया गया।
कार्यक्रम में राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को उनकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि सबसे पहले एक बच्चे और व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान उचित स्वास्थ्य सेवा, देखभाल और समय पर हस्तक्षेप से उसके भविष्य के विकास में मदद मिलती है।
पुस्तिका में 0 से 3 वर्ष के बच्चों के लिए ‘पहल (PEHAL)’ तथा 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए समावेशी स्कूल-पूर्व शिक्षा संबंधी गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसमें बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक-भावनात्मक, भाषाई और बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि समावेशी शिक्षा के माध्यम से विभिन्न क्षमताओं वाले बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। कार्यक्रम में दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के सचिव डॉ. माणिक गुरसाळ, महिला एवं बाल कल्याण विभाग की आयुक्त माधवी सरदेशमुख, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की सहसंस्थापक फरिदा लांबे, राज्य परियोजना निदेशक संजय यादव सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।



