
सोहराय पेंटिंग से सजेगी पीठौरिया-पतरातू घाटी, पर्यटकों को दिखेगी झारखंड की आदिवासी कला-संस्कृति
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रामगढ़ झारखंड
रामगढ़। झारखंड की प्रसिद्ध पीठौरिया-पतरातू घाटी को और आकर्षक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रांची से पतरातू और रामगढ़ की ओर जाने वाले इस खूबसूरत मार्ग पर बरसात के बाद विशेष पहल के तहत सोहराय पेंटिंग के जरिए घाटी की सुंदरता बढ़ाई जाएगी।
राज्य सरकार से जुड़ी कंपनियों और संबंधित विभागों की ओर से घाटी की साफ-सफाई के साथ यहां सोहराय कला को प्रदर्शित करने की योजना है। रंग-बिरंगी पारंपरिक चित्रकारी के माध्यम से पर्यटकों को झारखंड की समृद्ध कला और आदिवासी संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है घाटी
पीठौरिया-पतरातू घाटी अपनी घुमावदार सड़कों, ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों, पतरातू डैम, झरनों और यहां दिखाई देने वाली बंदरों की टोलियों के कारण पर्यटकों के बीच खास पहचान रखती है। पर्व-त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
घाटी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर यहां यातायात का दबाव और जाम की स्थिति भी देखने को मिलती है।
क्या है सोहराय पेंटिंग?
सोहराय झारखंड की पारंपरिक आदिवासी कला है, जिसका विशेष संबंध हजारीबाग क्षेत्र से माना जाता है। इसे मुख्य रूप से महिलाएं मिट्टी की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से बनाती हैं। इस कला में पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, ज्यामितीय आकृतियों और प्रकृति से जुड़े विभिन्न प्रतीकों को चित्रित किया जाता है।
इस कला को वर्ष 2020 में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ। झारखंड में रांची एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों, सरकारी भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सोहराय कला को प्रदर्शित किया जा चुका है।
पर्यटन के साथ स्थानीय कलाकारों को भी मिलेगा लाभ
घाटी में सोहराय पेंटिंग के जरिए सजावट का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थल की खूबसूरती बढ़ाना नहीं है, बल्कि झारखंड की पारंपरिक कला को नई पहचान देना भी है। इससे स्थानीय कलाकारों, विशेषकर महिला कलाकारों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बरसात के बाद जब घाटी हरियाली से भर उठती है, उस दौरान सोहराय पेंटिंग से सजे रास्ते और दीवारें पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बन सकती हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य और झारखंड की पारंपरिक कला का यह संगम पीठौरिया-पतरातू घाटी को पर्यटन के लिहाज से और खास बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


