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स्पेस सेक्टर में करियर के रोमांचक अवसर,

स्पेस सेक्टर में करियर के रोमांचक अवसर,

इसरो-एसपीपीयू स्पेस टेक्नोलॉजी सेल के डायरेक्टर डॉ. अरविंद शालिग्राम की सलाह

MIT-WPU में नेशनल स्पेस डे का आयोजन

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र में 

पुणे,: “पृथ्वी की समस्याओं को हल करने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण है. अंतरिक्ष मिशनों से विकसित जानकारी और क्षमताएं समाज के लिए किस तरह फायदेमंद हो सकती हैं, इस पर विचार करना ही असली अवसर है. छात्रों के लिए इस बदलाव ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, रिमोट सेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा साइंस, मटेरियल इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में करियर के रोमांचक अवसर उपलब्ध कराए हैं,” यह सलाह एसपीपीयू रिसर्च पार्क फाउंडेशन के एमडी और सीईओ तथा इसरो-एसपीपीयू स्पेस टेक्नोलॉजी सेल के डायरेक्टर डॉ. अरविंद शालिग्राम ने दी.

नेशनल स्पेस डे के अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कॉसमॉस एस्ट्रोनॉमी क्लब, डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स और AXSX की ओर से आयोजित दो दिवसीय “स्पेस एक्सपो 2026” के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वे बोल रहे थे.

इस अवसर पर DEMA के अध्यक्ष डॉ. शिरीष देशमुख, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हिरेन भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. साथ ही एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. दत्ता दंडगे, डॉ. अनुप काले और डॉ. सचिन कुलकर्णी उपस्थित थे.

माईर्स एमआईटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड के आशीर्वाद और एमआईटी WPU के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

डॉ. अरविंद शालिग्राम ने कहा, “भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र लंबे समय से वैज्ञानिक उत्कृष्टता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक रहा है. चाहे वह 1975 में आर्यभट्ट के प्रक्षेपण से लेकर सफल चंद्रयान और मार्स ऑर्बिटर मिशन तक का सफर हो, इसरो ने दिखाया है कि नवाचार और दृढ़ता से विश्वस्तरीय उपलब्धि हासिल की जा सकती है. आज भारत में निजी उद्योग सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर देश के अंतरिक्ष भविष्य को आकार दे रहे हैं. जैसे-जैसे हम अंतरिक्ष अभियानों की ओर बढ़ रहे हैं, हमें विश्वसनीयता, संचार, ऊर्जा, नेविगेशन, लाइफ-सपोर्ट सिस्टम, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व के बारे में गंभीरता से सोचना होगा. ये चुनौतियां अकेले एक संस्था हल नहीं कर सकती. इसके लिए वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और नीति-निर्माताओं को मिलकर काम करने की आवश्यकता है.”

हिरेन भट्ट ने कहा, “छात्रों के ज्ञान के आधार पर भविष्य बदलेगा. लेकिन विज्ञान के साथ-साथ प्रकृति और अध्यात्म को भी साथ रखना चाहिए. मूल्यों के आधार पर निरंतर अपना विकास करना चाहिए.”

डॉ. दत्ता दंडगे ने कहा, “नई पीढ़ी स्पेस के बारे में बेहद उत्सुक है. इस विश्वविद्यालय में विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से छात्रों को सर्वांगीण शिक्षा दी जाती है.”

डॉ. शिरीष देशमुख ने स्पेस क्षेत्र में काम करते समय रुचि, ज्ञान और नए-नए आइडियाज बहुत महत्वपूर्ण होने की बात कही.

डॉ. अनूप काले ने प्रस्तावना और स्वागत भाषण दिया. छात्रों तन्वी और सोहम ने कार्यक्रम का संचालन किया. डॉ. सचिन कुलकर्णी ने आभार माना.

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