
ध्वनि प्रदूषण का कारण बनने वाले डीजे-डॉल्बी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उचित : डॉ. हुलगेश चलवादी
आरपीआई के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने किया मांग का समर्थन
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : सार्वजनिक उत्सवों में बजाए जाने वाले तेज आवाज वाले डीजे और डॉल्बी साउंड सिस्टम से नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। इन खतरों को देखते हुए राज्यभर के सार्वजनिक उत्सवों में डीजे-डॉल्बी के इस्तेमाल पर स्थायी रूप से कड़ा प्रतिबंध लगाने की मांग का रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने समर्थन किया है।
डॉ. चलवादी ने कहा कि डीजे सिस्टम शुरू होते ही ध्वनि की तीव्रता 100 से 130 डेसिबल या उससे अधिक तक पहुंच जाती है, जो निर्धारित ध्वनि सीमा से कई गुना अधिक है। तेज आवाज और लेजर लाइट के कारण नागरिकों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए उत्सवों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक तेज आवाज के कारण हृदय संबंधी समस्याओं सहित कई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी घटनाएं सामने आती हैं। सांगली में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे की तेज आवाज के बीच 32 वर्षीय शेखर पावशे और 35 वर्षीय प्रवीण शिरतोडे की हृदयाघात से मृत्यु होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
डॉ. चलवादी ने कहा कि डीजे-डॉल्बी की कर्णकर्कश आवाज में गाने बजाना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। सार्वजनिक उत्सवों का उद्देश्य समाज में एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना होना चाहिए।
उन्होंने उत्सव मंडलों से डीजे-डॉल्बी के बजाय ढोल-ताशा, लेझीम, हलगी, तुतारी और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के बजाय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने वाले उत्सव मनाना समय की जरूरत है।

