
विद्यालयों में गुणवत्ता, नामांकन एवं छात्र उपस्थिति बढ़ाने पर जिलाधिकारी महोदय ने दिया जोर, लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा—जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में जिला शिक्षण एवं अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं, विद्यालयों में छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति, नवीन नामांकन, मध्यान्ह भोजन योजना, निपुण भारत मिशन, विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
विद्यालयों में फर्नीचर एवं अन्य सामग्री के क्रय तथा भुगतान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सामग्री की खरीद से पूर्व उसकी गुणवत्ता एवं मानकों की विधिवत जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी सामग्री की गुणवत्ता खराब है तो उसका भुगतान न किया जाए तथा आवश्यकतानुसार जांच कराकर ही आगे की कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी महोदय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विद्यालयों के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने निर्देश दिए कि रसोइयों के मानदेय अथवा अन्य देयकों का कोई भुगतान लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने विद्यालयों में छात्र उपस्थिति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। बैठक में अवगत कराया गया कि मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत छात्रों की कुल उपस्थिति 77.06 प्रतिशत है। जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि छात्र उपस्थिति के आंकड़ों में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा अथवा गलत फीडिंग न हो तथा वास्तविक उपस्थिति के आधार पर ही विवरण दर्ज किया जाए।
नवीन नामांकन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि विद्यालयों में अधिक से अधिक बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। ब्लॉक/नगर क्षेत्रवार नवीन नामांकन 22,555 बताया गया, जबकि पिछले वर्ष 24,917 नामांकन हुए थे। इस पर जिलाधिकारी महोदय ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष नामांकन कम नहीं होना चाहिए। प्रत्येक विद्यालय एवं क्षेत्र में नामांकन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी विद्यालय अथवा क्षेत्र में नामांकन शून्य या अत्यंत कम होने की स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जहां नामांकन कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाए।
स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शैक्षिक सत्र 2026-27 के नवीन नामांकन की ब्लॉकवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रत्येक क्षेत्र में नामांकन बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी बच्चे का विद्यालय में प्रवेश छूटने न पाए। जिन क्षेत्रों में नामांकन कम है, वहां विशेष रूप से कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जाए।
ब्लॉकवार पासआउट विद्यार्थियों के एनालिटिक्स की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने ड्रॉपआउट रोकने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी से कहा कि बड़ी संख्या में पासआउट हुए बच्चों में से कितने बच्चों ने आगे प्रवेश लिया और कितने बच्चे विद्यालय से बाहर हैं, इसकी वास्तविक जानकारी प्राप्त की जाए। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक एवं विद्यालय से संपर्क कर बच्चों के प्रवेश की स्थिति की जानकारी ली जाए। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी बच्चा पढ़ाई से बाहर न हो। शिक्षक बच्चों एवं अभिभावकों की काउंसलिंग कर ड्रॉपआउट रोकने के लिए प्रभावी प्रयास करें।
सपोर्टिव सुपरविजन एवं निपुण भारत मिशन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कार्य में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए। बैठक में सपोर्टिव सुपरविजन एसआरजी का 100 प्रतिशत तथा डायट मेंटर्स का 78 प्रतिशत बताया गया। जिलाधिकारी महोदय ने 1,484 विद्यालयों में निपुण आकलन की स्थिति की समीक्षा करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी से पूछा कि सभी विद्यालयों में नियमित आकलन की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक माह प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों का आकलन कराया जाए तथा उसकी नियमित समीक्षा की जाए।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि यदि 1,484 विद्यालयों में निपुण आकलन निर्धारित समय पर नहीं हुआ है तो संबंधित प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी तय की जाए। जिन विद्यालयों में आकलन नहीं कराया गया, उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए तथा सभी खंड शिक्षा अधिकारी इसकी जानकारी प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि कार्य के प्रति किसी भी स्तर पर गैर-जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों एवं शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें, तभी बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी को अगली बैठक में इस संबंध में स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
विद्यालयों में छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति की समीक्षा में छात्र उपस्थिति 77.06 प्रतिशत तथा शिक्षक उपस्थिति 88 प्रतिशत बताई गई। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा अनुपस्थिति के कारणों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
निपुण भारत मिशन के विस्तार एवं निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों की नियमित समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा निर्माणाधीन 32 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 324 फर्नीचर डेस्क-बेंच के संबंध में जिलाधिकारी महोदय ने गुणवत्ता को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी से कहा कि यदि फर्नीचर की गुणवत्ता खराब थी तो उसे स्वीकार क्यों किया गया। जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि अधिकारी कार्यों में रुचि लेकर मौके पर निरीक्षण करें और गुणवत्ता से समझौता न होने दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों के कार्यों में ऐसी उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
पीएम श्री विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं एवं स्मार्ट क्लास संचालन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने निर्देश दिए कि स्मार्ट क्लास के लिए दिए गए प्रशिक्षण का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा भी इन विद्यालयों की अलग से समीक्षा की जा रही है। समर्थ पोर्टल के आधार पर दिव्यांग बच्चों की स्थिति, बच्चों एवं शिक्षकों उपस्थिति तथा बच्चों लर्निंग आउटकम की नियमित समीक्षा की जाए तथा शासन एवं सरकार की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, उनका वास्तविक उपयोग बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में होना चाहिए।
बरसात के मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी महोदय ने विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं सभी खंड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति की जानकारी रखें। जो विद्यालय जर्जर हैं, वहां बच्चों को न बैठाया जाए तथा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिन विद्यालयों तक पहुंचने का मार्ग खराब है, उसे संबंधित विभाग से समन्वय कर दुरुस्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसी भी बच्चे के साथ दुर्घटना न हो और कोई बच्चा चोटिल न हो।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि शिक्षा विभाग से जुड़े सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें। विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्र-शिक्षक उपस्थिति, नामांकन एवं बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अगली बैठक तक दिए गए निर्देशों पर ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाए और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उक्त बैठक ने मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ राजेश कुमार, कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, डी0पी0आर0ओ रोहित कुमार, समस्त खंड शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित विभाग अधिकारीगण एवं कर्मचारी उपस्थिति रहे।


