
छोटे कदम, बड़ा भविष्य: आदित्य बिरला सन लाइफ पेंशन फंड की एनपीएस वात्सल्य योजना में स्कूल जाने वाले बच्चों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
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बच्चों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग बचपन से ही, आदित्य बिरला सन लाइफ पेंशन फंड की एनपीएस वात्सल्य में सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर स्कूल जाने वाले बच्चे
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
आदित्य बिरला सन लाइफ पेंशन फंड में एनपीएस वात्सल्य के ज्यादातर ग्राहक स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। देशभर में इस योजना को लेकर रुझान तेजी से बढ़ रहा है और माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र में ही लंबी अवधि की बचत से जोड़ रहे हैं।
यहां 10 से 14 साल की उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी 36.9% है। इसके बाद 5 से 9 साल के बच्चे आते हैं, जिनका हिस्सा 31.6% है। 15 से 19 साल वाले 21.1% हैं, जबकि 0 से 4 साल के सबसे छोटे बच्चे 10.4%।
कुल मिलाकर 68.5% ग्राहक 15 साल से कम उम्र के हैं। यानी बड़ी संख्या में माता-पिता बच्चों के बड़े होने का इंतजार करने के बजाय, उनके स्कूल के दिनों से ही भविष्य के लिए बचत शुरू कर रहे हैं।
यह रुझान देशभर में एनपीएस वात्सल्य के बढ़ते दायरे की पृष्ठभूमि में सामने आया है। पीएफआरडीए के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 में इस योजना के ग्राहक 1.07 लाख थे, जो मार्च 2026 में बढ़कर 2.15 लाख हो गए। यानी एक साल में करीब 100% की बढ़ोतरी। इसके बाद भी रफ्तार बनी रही और अगस्त 2026 में यह आंकड़ा 4 लाख से ज्यादा अलग-अलग ग्राहकों तक पहुंच गया। बच्चों के लिए लंबी अवधि की बचत पर विचार कर रहे माता-पिता और अभिभावकों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
जमा पैसों के पैटर्न से दिखता है कि लोग एकमुश्त निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि ग्राहकों को इन एकमुश्त निवेशों को एसआईपी में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे लगता है कि माता-पिता केवल एक बार पैसा लगाने के बजाय, नियमित योगदान के जरिए अपने बच्चों के लिए लंबी अवधि का फंड बनाना पसंद कर रहे हैं। योजना को शुरुआती दौर में अपनाए जाने से यह भी झलकता है कि इसमें परिवारों की मौजूदा वित्तीय आदतों की भूमिका हो सकती है।
आदित्य बिरला सन लाइफ पेंशन फंड में एनपीएस वात्सल्य के ग्राहकों का एक हिस्सा ऐसे माता-पिता के बच्चे हैं, जिनके खुद कॉरपोरेट, सरकारी या ऑल-सिटीजन मॉडल के तहत एनपीएस खाते हैं। कुछ परिवारों में एनपीएस के जरिए लंबी अवधि की बचत एक आदत बनती दिख रही है, जिसे अब अगली पीढ़ी तक बढ़ाया जा रहा है।
छोटी उम्र में बचत शुरू करने का यह कदम एनपीएस वात्सल्य के व्यापक उद्देश्य से भी मेल खाता है। पीएफआरडीए के मुताबिक यह बच्चों के लिए ऐसी योजना है जिसमें नियमित योगदान करना होता है और जो लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा देती है। इसका मकसद बचपन से ही वित्तीय समझ और वित्तीय योजना बनाने को बढ़ावा देना है।
यह योजना परिवारों को अपेक्षाकृत कम राशि से शुरुआत की सुविधा भी देती है। पीएफआरडीए के मौजूदा नियमों के अनुसार, एनपीएस वात्सल्य खाता न्यूनतम 250 रुपये से खोला जा सकता है और हर साल कम से कम 250 रुपये जमा करना अनिवार्य है, जबकि अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। रिश्तेदार और दोस्त भी बच्चे के खाते में उपहार के रूप में पैसा जमा कर सकते हैं, जिससे यह बचत परिवार का साझा प्रयास बन सकती है।
स्कूल के दिनों से ही निवेश शुरू करने की अहमियत इस बात में है कि आगे लंबा समय मिलता



