पूणेमहाराष्ट्र

सखी नेटवर्क करीब 30,000 से अधिक संभावित यूजर्स तक पहुंचा, 18 महीनों में ग्रामीण महाराष्ट्र में करीब 1,400 आजीविका से जुड़ी स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाली तकनीकों को पहुंचाने में मदद की

सखी नेटवर्क करीब 30,000 से अधिक संभावित यूजर्स तक पहुंचा, 18 महीनों में ग्रामीण महाराष्ट्र में करीब 1,400 आजीविका से जुड़ी स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाली तकनीकों को पहुंचाने में मदद की

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, : काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW), जो नई दिल्ली स्थित स्वदेशी और दुनिया के अग्रणी क्लाइमेट थिंक टैंक में से एक है, ने आज पुणे में “हाउ रूरल वुमेन आर ड्राइविंग अडॉप्शन ऑफ क्लीन एनर्जी पॉवर्ड लाइवलीहुड् इन्नोवेशंस इन महाराष्ट्र” विषय पर एक नॉलेज शेयरिंग राउंडटेबल का आयोजन किया। सीईईडब्ल्यू के शोधकर्ताओं ने बताया कि सखी मॉडल किस तरह से विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा (decentralised renewable energy, DRE) से चलने वाली विभिन्न तकनीकों को अपनाने की दर बढ़ा सकता है और ग्रामीण महाराष्ट्र में प्रगति को गति दे सकता है।

 

सीईईडब्ल्यू के 2023 के अध्ययन के अनुसार, महाराष्ट्र में सोलर ड्रायर, छोटे बागवानी प्रोसेसर जैसी 15 लाख स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविका तकनीकों के जरिए 28 लाख ग्रामीण परिवारों की आजीविका को बेहतर बनाने की संभावनाएं हैं। इसके बावजूद अपनाने का स्तर सीमित रहा। इसकी बड़ी वजह है कि किसान और लघु उद्यमियों को अक्सर इन समाधानों के बारे में जानकारी नहीं होती है, नई तकनीकों पर उनका भरोसा भी कम होता है, ये तकनीकी नवाचार स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते हैं। इसके अलावा, संभावित यूजर्स को इनके लिए किफायती वित्तपोषण विकल्पों तक पहुंचने में भी समस्या आती है।

 

सखी मॉडल: महिलाओं की अगुवाई में अंतिम छोर तक पहुंचने वाले इकोसिस्टम का निर्माण

इन तमाम बाधाओं को दूर करने के लिए, सीईईडब्ल्यू और विलग्रो इनोवेशन्स फाउंडेशन (Villgro Innovations Foundation) की संयुक्त पहल पावरिंग लाइवलीहुड्स (Powering Livelihoods) ने ग्रामीण महाराष्ट्र में स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविका तकनीकों को तेजी से बढ़ावा देने के लिए सखी यूनिक रिसोर्स एंटरप्राइज (Sakhi Unique Resource Enterprise, SURE) के साथ साझेदारी की। SURE एक महिला-केंद्रित सामाजिक उद्यम है, जो “सखी” कही जाने वाली प्रशिक्षित महिला उद्यमियों के जरिए जलवायु-अनुकूल आजीविका, स्वच्छ ऊर्जा, और स्वास्थ्य व कल्याण से जुड़ी तकनीकों तक अंतिम छोर तक पहुंच बनाता है। SURE ने राज्य में 350 ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए प्रशिक्षित किया है।

 

तकनीक के यूजर्स से तकनीक के नेतृत्वकर्ता बनने तक

ये सखी गांव-स्तर पर विभिन्न तकनीकों को प्रदर्शित करने के सत्र आयोजित करती हैं, उनमें कुछ सखियां स्वयं भी इन तकनीकों का उपयोग करती हैं, और इनके बारे में जागरूकता लाने व इनकी बिक्री बढ़ाने के लिए समुदाय के साथ अपने भरोसेमंद रिश्तों का उपयोग करती हैं। इसके अलावा, SURE ने तीन जिलों में एक्सपीरियंस सेंटर (Experience Centres) शुरू किए हैं, जो प्रदर्शन केंद्र के रूप में काम करते हैं, जहां सखी और उपकरणों के यूजर्स अन्य लोगों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने में मदद करते हैं। इससे किसान और उद्यमी इन तकनीकों को खरीद से पहले इन्हें देख व संचालित कर सकते हैं, इनके बारे में अच्छी तरह से समझ सकते हैं। यह पीयर-टू-पीयर (peer-to-peer) मॉडल नए यूजर्स को जागरूक करने के प्रयासों को एक अमूर्त प्रचार से एक भरोसेमंद, समुदाय-संचालित अभियान में बदल देता है। महज 18 महीनों में, सखी नेटवर्क ने रोडशो, गांव-स्तरीय अभियानों, ट्रेड एक्टिवेशन कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और सामुदायिक बैठकों के जरिए करीब 30,000 से अधिक संभावित यूजर्स तक पहुंच बनाई है और ग्रामीण महाराष्ट्र में करीब 1,400 स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविका तकनीकों को पहुंचाने में मदद की है।

क्लाइमेट चैंपियंस लीग: महिलाओं को जलवायु नेतृत्वकर्ता बनाना

क्लाइमेट चैंपियंस लीग (Climate Champions League, CCL) एक प्रोत्साहन-आधारित अभियान है। इसे महिला सखियों के नेटवर्क के जरिए स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविका तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए SURE के साथ मिलकर लागू किया गया था। इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League, IPL) से प्रेरित होकर 50 दिन में स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को अपनाने के चैलेंज के रूप में तैयार इस अभियान ने लाइव लीडरबोर्ड, आपसी प्रतिस्पर्धा, और प्रदर्शन-आधारित पुरस्कारों के जरिए 350 सखियों को जोड़ा, जो पूरे अभियान के दौरान लोगों को प्रेरित करते रहे। इस पहल ने 1.75 करोड़ रुपये से अधिक की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की बिक्री की और 1,500 से अधिक आजीविकाएं सृजित करने में मदद की। इससे अंतिम छोर पर स्वच्छ ऊर्जा संचालित विकेंद्रीकृत तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा मिला और साथ ही आय के स्रोतों में विविधता लाकर आर्थिक अधिक मजबूती सुनिश्चित हुई। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली सखियों को इलेक्ट्रिक स्कूटर से पुरस्कृत करते हुए सम्मानित किया गया, जिससे नेटवर्क के भीतर उपलब्धि और आकांक्षा दोनों को प्रोत्साहन मिला।

 

दिव्या गौर, प्रोग्राम लीड, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), “यह सखी मॉडल दिखाता है कि ग्रामीण महिलाएं स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को अपनाने से आगे बढ़कर उनके लिए अतिरिक्त बाजार अवसर (additional economic opportunity) भी तैयार कर रही हैं। अपने समुदायों के भरोसे का इस्तेमाल करते हुए, वे जानकारी, पहुंच और वित्तपोषण की उन कमियों को दूर कर रही हैं, जिन्होंने लंबे समय से डीआरई तकनीकों के विस्तार को सीमित रखा है। उद्यमी, जलवायु समर्थक (climate advocates) और आजीविका सलाहकार के रूप में, सखियां अब किसानों और ग्रामीण उद्यमों को अधिक मजबूत बनाने, कम कार्बन उत्सर्जन वाली आजीविका को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम बना रही हैं। साथ ही, अपने लिए नए आर्थिक अवसर भी तैयार कर रही हैं। उनका नेतृत्व दिखाता है कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल अधिक लैंगिक समावेश का उपाय भर नहीं है, यह स्वच्छ ऊर्जा को मुख्यधारा में लाने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने, और भारत के जलवायु परिवर्तन का सामना करने में सक्षम ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में बदलाव को गति देने वाली एक ताकतवर रणनीति भी है।”

सफल सखियां

फरजाना बेग महाराष्ट्र के धाराशिव तालुका व जिले के गौडगांव गांव की रहने वाली हैं और SURE सखी के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने मई 2025 में सोलर ड्रायर डी500 (Solar Dryer D500) अपनाया और ढाई महीने के भीतर 100 किलो से अधिक सूखा आम और 40 किलो सूखे करी पत्ते की प्रोसेसिंग करके 30,000 रुपये कमाए। इन सूखे उत्पादों को राहेजा कंपनी (Raheja Company) को क्रमश: 450 रुपये प्रति किलो व 120 रुपये प्रति किलो की अधिक दरों पर खरीदा। अपने उद्यम से आगे बढ़कर फरजाना छंटाई व प्रोसेसिंग जैसे कामों में मदद करने के लिए गांव की दूसरी महिलाओं को काम पर रखती हैं, और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित करती हैं। उनकी इस कामयाबी ने दूसरों को भी सोलर ड्रायर लगाने के लिए प्रेरित किया है। वे अपने सोलर ड्रायिंग कारोबार को ग्रामीण महिला उद्यमिता के एक मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही हैं।

 

 

जयश्री माली महाराष्ट्र के धाराशिव तालुका व जिले के तेर गांव की रहने वाली हैं और SURE सखी हैं। लगभग एक साल पहले उद्यमिता की अपनी यात्रा शुरू करने के बाद उन्होंने डीडी सोलर (DD Solar) के आसपास अपना कारोबार शुरू किया है। इससे उनकी सब्जियां ताजी बनी रहती हैं। इससे उन्हें रोशनी और पंखे की भी सुविधा मिलती है और घर के बिजली खर्च में कमी आती है। इससे उन्हें हर महीने 3,000 रुपये की अतिरिक्त आय होती है। डीडी सोलर के साथ-साथ उन्होंने बायोगैस, हाइड्रोपोनिक यूनिट (hydroponic units) व जैविक खाद जैसे कई तरह के उत्पादों को आगे बढ़ाया है और समुदाय के अन्य लोगों को आजीविका के नए विकल्प खोजने में मदद की है। उनकी यात्रा दिखाती है कि जमीनी आत्मविश्वास और समुदायिक भागीदारी कैसे सतत ग्रामीण उद्यमिता में बदल सकती है।

 

 

सुजाता गोरख पाटील महाराष्ट्र के धाराशिव के शिंगोली गांव में रहती हैं और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के साथ-साथ SURE सखी भी हैं। वे कृषि और सामाजिक कार्य में मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ आती हैं। उन्होंने कृषि में डिप्लोमा, एम.ए. और मास्टर ऑफ सोशल वर्क (Master of Social Work) जैसी डिग्रियां हासिल की हैं। SURE से जुड़ने से पहले उन्होंने एक कृषि कॉलेज में शिक्षण स्टाफ के रूप में काम किया है। आज वे हर महीने करीब 30,000 रुपये कमाती हैं और आजीविका व महिला नेतृत्व को मजबूत करने के लिए ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर काम करती हैं। उनके काम में सतत कृषि, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, पानी व स्वच्छता, और सरकारी योजनाओं व वित्तीय उपायों तक आसान पहुंच शामिल है। सुजाता व्यावहारिक प्रदर्शन, किसानों के अनुभव, डिजिटल लर्निंग और ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण के जरिये आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और बेहतर उपायों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

 

 

उर्मिला प्रवीण कलदाते महाराष्ट्र के धाराशिव में SURE के साथ बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (Business Correspondent) हैं। आजीविका के अवसर बनाने और ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करने के लिए, वे फरवरी 2026 में SURE से जुड़ीं। SURE के साथ काम करते हुए उनकी मासिक आय 16,000 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये हो गई है। उर्मिला महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें प्रेरित करती हैं कि वे आजीविका के नए अवसर तलाशें, बहुत कम या बिना किसी निजी निवेश के सखी आधारित कारोबार शुरू करें, और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में हिस्सा लेने का आत्मविश्वास बनाएं। उनके काम का असर विस्तार ले रहा है और उनके गांव की अन्य महिलाएं सखी नेटवर्क से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

 

 

 

 

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