
श्री विश्वनाथ महाकालेश्वर मंदिर में शिव तत्व की अनुभूति का जागरण
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । सृष्टि के आदिम तत्वों, ध्यान-योग की अखंड परंपरा तथा संहार से सृजन करने वाली चेतना के प्रतीक आदियोगी भगवान शिव के स्मरण के साथ श्रावण मास के पावन अवसर पर श्री विश्वनाथ महाकालेश्वर मंदिर में भक्तिभाव से धार्मिक आयोजन किया गया।
माईर्स एमआईटी शिक्षण संस्था समूह, पुणे एमआईएमईआर मेडिकल कॉलेज एवं डॉ. भा.स.त.ग्रा. रुग्णालय, तलेगांव परिसर में स्थापित श्री विश्वनाथ महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। भजन, कीर्तन और हरिपाठ से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सामूहिक भक्ति से सराबोर रहा।
इस अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि संपूर्ण श्रावण मास केवल बाहरी उपासना का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मजागृति का भी समय है। जिस प्रकार शिवलिंग पर अभिषेक के माध्यम से पवित्रता का अनुभव किया जाता है, उसी प्रकार मन के भीतर मौजूद अज्ञान, अहंकार और नकारात्मकता को दूर कर आत्मप्रकाश की ओर बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शैव दर्शन में शिव केवल एक देवता का स्वरूप नहीं, बल्कि योग, ध्यान, संयम और आत्मजागृति के मूर्त तत्व हैं। शिव शून्य और पूर्णत्व के संगम का प्रतीक हैं तथा सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय की त्रिकालिक प्रक्रिया के केंद्र माने जाते हैं। श्रावण मास त्याग, संतुलन और विश्वकल्याण की भावना का प्रतीक है।

मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हरि कीर्तन, शिवलीलामृत पारायण और हरिपाठ से हुई। इस अवसर पर माईर्स एमआईटी मेडिकल कॉलेज की संचालिका डॉ. सुचित्रा नागरे, विश्वस्त सौ. स्वाती चाटे, सौ. उषा विश्वनाथ कराड, डॉ. संजय उपाध्ये, गिरीश दाते, डॉ. महेश थोरवे और योगेश पारखी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
तलेगांव के ग्रामीणों के साथ ही मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के शिक्षक तथा शिक्षकेतर कर्मचारियों ने मंदिर में भगवान शिव के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक आयोजन के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।



