
सवाल पूछने का तरीका भी पत्रकारिता का हिस्सा, वायरल होने की होड़ पर उठे सवाल
पीछे से चीखकर सवाल पूछना, क्या पत्रकारिता की जिम्मेदारी होती है क्या?
विशाल समाचार | पत्रकार डी.एस. तोमर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के दौरान पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव द्वारा सवाल पूछे जाने के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक ओर पत्रकार का सत्ता से सवाल करना लोकतांत्रिक पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वहीं दूसरी ओर सवाल पूछने के तरीके और मंच की मर्यादा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो/दावों में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना संबोधन समाप्त कर मंच से निकलने लगे, तभी पीछे से पत्रकार द्वारा उनसे सवाल का जवाब देने का आग्रह किया गया। इसी को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि यदि सवाल पूछना था तो कार्यक्रम के दौरान माइक लेकर या निर्धारित संवाद के समय सवाल रखा जा सकता था।
यहां सबसे बड़ा सवाल पत्रकारिता की मर्यादा और सवाल पूछने के तरीके का है। पत्रकार का काम सत्ता से सवाल करना है, लेकिन सवाल किस मंच पर, किस समय और किस तरीके से पूछा जाए—यह भी पत्रकारिता की पेशेवर जिम्मेदारी का हिस्सा है।
दूसरी ओर, यदि किसी पत्रकार ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा और उसके बाद उनके साथ किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस इकाई द्वारा पूछताछ की गई है, तो इस दावे की आधिकारिक पुष्टि और उसका आधार सामने आना भी जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के आधार पर किसी विभाग या अधिकारी पर आरोप तय करना उचित नहीं होगा।
विशाल समाचार का सवाल:
क्या पत्रकार द्वारा सत्ता से सवाल पूछना गलत है, या सवाल पूछने का तरीका और मंच की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? और यदि पत्रकार से वास्तव में किसी सरकारी एजेंसी ने पूछताछ की है, तो उसका आधिकारिक कारण क्या था?
पत्रकारिता में सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन सवाल पूछने वाले की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी तरह सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही भी जरूरी है। इसलिए इस पूरे मामले में आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संबंधित पक्षों का स्पष्ट और आधिकारिक पक्ष सामने आना चाहिए।
विशाल समाचार | पत्रकार डी.एस. तोमर



