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पर्दे के पीछे क्या है? BRICS समिट के बीच दिल्ली की बस्ती पर पड़ा पर्दा, विकास के दावों पर उठे सवाल

पर्दे के पीछे क्या है? विकास के दावों और जमीनी हकीकत पर बहस तेज

BRICS   समिट के बीच दिल्ली की बस्ती पर पर्दा, उठे सवाल

पर्दे के पीछे क्या है? BRICS समिट के बीच दिल्ली की बस्ती पर पड़ा पर्दा, विकास के दावों पर उठे सवाल

पर्दे के पीछे क्या है? विकास के दावों और जमीनी हकीकत पर बहस तेज

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान नई दिल्ली

नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन के मद्देनजर राजधानी दिल्ली को सजाने-संवारने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बीच दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार स्थित कूली कैंप के आसपास पर्दे लगाए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बस्ती को सड़क की ओर से पर्दों से ढकने की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक इस व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

 

यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान दिल्ली की बस्तियों को पर्दों के पीछे किया गया हो। इससे पहले वर्ष 2023 में G20 सम्मेलन के दौरान भी कूली कैंप को पर्दों से ढके जाने की खबर सामने आई थी।

 

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने राजधानी की गरीबी और बस्तियों को पर्दे के पीछे रखना जरूरी है?

BRICS जैसा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। राजधानी को व्यवस्थित और स्वच्छ रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन सवाल यह है कि शहर की खूबसूरती केवल पर्दों, सजावट और चमकती सड़कों से दिखाई जाए या फिर उन इलाकों की स्थिति सुधारने पर भी ध्यान दिया जाए, जहां लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पर्दा हटेगा तो तस्वीर भी सामने आएगी। यही वजह है कि अब चर्चा केवल पर्दे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के विकास की उस तस्वीर पर भी हो रही है जो बड़े आयोजनों के दौरान दिखाई जाती है।

सरकार की ओर से विकास और बदलती दिल्ली के दावे लगातार किए जाते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि विकास जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है तो बस्तियों को पर्दों के पीछे करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

क्या यह केवल सुरक्षा और आयोजन व्यवस्था का हिस्सा है या फिर राजधानी की एक ऐसी तस्वीर को नजरों से दूर रखने का प्रयास, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने नहीं दिखाना चाहते?

हालांकि पर्दे लगाने के उद्देश्य को लेकर प्रशासन की आधिकारिक व्याख्या को भी सामने रखा जाना जरूरी है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने शहरी विकास, गरीबी और असमानता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

विशाल समाचार की ग्राउंड रिपोर्ट का सवाल

शहर को पर्दे से सुंदर दिखाना आसान है, लेकिन क्या शहर की उन बस्तियों की जिंदगी बदलना ज्यादा जरूरी नहीं, जिन्हें पर्दे के पीछे किया जा रहा है?

पर्दे कुछ दिनों के लिए लग सकते हैं, लेकिन विकास की असली परीक्षा पर्दा हटने के बाद दिखाई देगी।

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