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बासमती धान में 11 कीटनाशकों के इस्तेमाल पर 60 दिन का प्रतिबंध

बासमती धान में 11 कीटनाशकों के इस्तेमाल पर 60 दिन का प्रतिबंध

 

निर्यात योग्य गुणवत्तापूर्ण चावल के लिए कृषि विभाग ने किसानों और विक्रेताओं को जारी किए निर्देश

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान औरैया उत्तर प्रदेश 

औरैया, । जिला कृषि रक्षा अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) के अंतर्गत औरैया जनपद भी चयनित है। बासमती धान में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम अवशेष स्तर (एमआरएल) से अधिक पाए जाने के कारण बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी को देखते हुए शासन ने बासमती धान में कुछ कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया है।

 

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन, कृषि अनुभाग-2, लखनऊ की अधिसूचना के तहत औरैया सहित प्रदेश के 30 जनपदों में बासमती चावल की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से 11 कीटनाशकों के सभी प्रकार के फॉर्मूलेशन की बिक्री, वितरण एवं प्रयोग पर अधिसूचना के गजट प्रकाशन की तारीख से 60 दिनों की अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।

 

प्रतिबंधित कीटनाशकों में ट्राइसाइक्लाजोल, ब्यूप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरोपाइरीफॉस, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, टेबुकोनाजोल, कार्बोफ्यूरान एवं कार्बेन्डाजिम शामिल हैं।

 

विक्रेताओं को चेतावनी

 

कृषि विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के माध्यम से जिले के सभी कीटनाशी विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि बासमती धान में लगने वाले कीट एवं रोगों के नियंत्रण के लिए प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री अथवा किसानों से उनका प्रयोग न कराया जाए। प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री करते हुए कोई विक्रेता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कीटनाशी अधिनियम के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

विभाग ने कीटनाशक विक्रेताओं को बासमती धान में आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक कीटनाशकों के प्रयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इनमें फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी, एसीटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी, कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत जीआर, लैम्डासायहैलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी, टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ईसी, डाइफेनोकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी तथा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी शामिल हैं।

 

जैविक एवं वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह

 

कृषि विभाग ने किसानों को फसल सुरक्षा के लिए समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी है। साथ ही नीम ऑयल, एजाडिरेक्टिन, ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बैसियाना, स्यूडोमोनास, मेटाराइजियम, बीटी एवं एनपीवी जैसे जैव कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

 

इसके अलावा कीट नियंत्रण के लिए लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और ट्राइकोकार्ड जैसे वैकल्पिक उपायों का प्रयोग करने के लिए भी किसानों को जागरूक करने को कहा गया है।

 

फसल पकने से एक माह पहले कीटनाशक बंद करने की अपील

 

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने जनपद के सभी बासमती धान उत्पादक किसानों से अपील की है कि प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग बासमती धान में बिल्कुल न करें। फसल संरक्षण के लिए आईपीएम की विभिन्न पद्धतियों को अपनाएं और अत्यंत आवश्यकता होने पर ही विभाग द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक रसायनों का प्रयोग करें।

 

उन्होंने किसानों से विशेष रूप से कहा कि फसल पकने से एक माह पूर्व कीटनाशकों का प्रयोग पूरी तरह बंद कर दें, ताकि कटाई के बाद धान एवं चावल में कीटनाशकों के अवशेष न रहें। इससे बासमती चावल की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

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