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धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप की आशंका, किसान नियमित निगरानी करें

धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप की आशंका, किसान नियमित निगरानी करें

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान रीवा मध्य प्रदेश 

  रीवा . जिले में हाल में हुई लगातार वर्षा एवं खेतों में जलभराव की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप की आशंका को लेकर कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा द्वारा किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वर्तमान मौसम की परिस्थितियों में धान की फसल में कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी किया जाना आवश्यक है। उप संचालक कृषि यू.पी. बागरी ने जिले के कृषकों से अपील की है कि वे अपने धान के खेतों का नियमित निरीक्षण करें। पत्तियों पर पत्ती लपेटक कीट के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के मैदानी अमले अथवा कृषि विज्ञान केंद्र रीवा के वैज्ञानिकों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें। अनावश्यक रूप से कीटनाशकों का प्रयोग न करें तथा अनुशंसित कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में ही उपयोग करें।

 

कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पत्ती लपेटक कीट धान की पत्तियों को मोड़कर अंदर से हरे भाग को खाता है। इसके प्रकोप की स्थिति में पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देने लगती हैं तथा अधिक प्रकोप होने पर पत्तियां सूख सकती हैं। इससे पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है। अतः ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसान तत्काल खेत का निरीक्षण करें। पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप के लक्षण दिखाई देने पर नियंत्रण हेतु क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 9.3 % + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 4.6% ZC-80 से 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ या इंडोक्साकार्ब 14.5% SC-150 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा थायामेथोक्सम 12.6% + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 9.5% ZC-60 से 80 मिलीलीटर प्रति एकड़ में से किसी एक कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है।

 

किसानों को सलाह दी गई है कि एक समय में इनमें से किसी एक कीटनाशक का ही प्रयोग करें। कीटनाशक का छिड़काव फसल की स्थिति एवं प्रकोप के आधार पर कृषि विभाग अथवा कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन तथा उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार किया जाए। अनावश्यक रूप से विभिन्न कीटनाशकों को आपस में मिलाकर प्रयोग न करें। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि खेत में अनावश्यक रूप से लंबे समय तक पानी भरा न रहने दें तथा आवश्यकतानुसार जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। फसल की नियमित निगरानी करते हुए प्रारंभिक अवस्था में ही कीट प्रकोप की पहचान कर नियंत्रण उपाय अपनाना अधिक प्रभावी रहेगा। उप संचालक कृषि ने जिले के कृषकों से अपील की है कि पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप की स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि समय पर खेत का निरीक्षण कर कृषि विभाग के मैदानी अमले अथवा कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें तथा अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाकर धान की फसल को संभावित नुकसान से बचाएं।

 

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