
राज्य में पानी की कमी और सूखे के साये को देखते हुए नाशिक कुंभ मेले का आयोजन सादगी से हो:— कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति और पानी की कमी को देखते हुए नाशिक में होने वाले कुंभ मेले का आयोजन सादगीपूर्ण तरीके से किया जाए। मेले में होने वाले खर्च में बचाई गई राशि का उपयोग किसान, कृषि और जल नियोजन के लिए किया जाए। यह मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने एक बयान जारी कर की है।
गोपालदादा तिवारी ने कहा कि वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के लिए महाराष्ट्र सरकार ने शुरुआत में 25 सितंबर 2026 को 358 में से 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया था। यह निर्णय सूखा प्रबंधन संहिता, 2016 के Trigger-1 मानदंडों के आधार पर लिया गया था। इसके बाद 30 सितंबर 2026 को 43 और तहसीलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र में शामिल करने का निर्णय मंत्रिमंडल उपसमिति द्वारा लिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या 308 हो जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि 358 में से 308 तहसील सूखा प्रभावित हैं, तो राज्य के बड़े हिस्से में पानी की गंभीर समस्या है। ऐसे में 31 अक्टूबर से शुरू होने वाले नाशिक कुंभ मेले का आयोजन राज्य की मौजूदा जल स्थिति, किसानों के संकट और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सादगी से किया जाना चाहिए।
तिवारी ने मांग की कि इस मुद्दे पर महायुति सरकार तत्काल दो दिवसीय अधिवेशन अथवा विपक्ष सहित सर्वदलीय बैठक बुलाए। साथ ही, महाराष्ट्र की मौजूदा परिस्थितियों और कुंभ मेले के आयोजन से जुड़े जल प्रबंधन की स्थिति को लेकर देश के सामने वस्तुस्थिति रखी जाए।
उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधन केंद्र सरकार अथवा अन्य माध्यमों से जुटाए जा सकते हैं, लेकिन नाशिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में गोदावरी नदी तथा कुशावर्त कुंड के लिए बड़े पैमाने पर पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे समय में जब राज्य के बांधों का जलस्तर और उपलब्ध पानी मौजूदा आबादी की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है, पानी का उपयोग अत्यंत सावधानी और नियोजन के साथ किया जाना आवश्यक है।
गोपालदादा तिवारी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों, खेती और आम नागरिकों की पानी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।



