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निःस्पृह पत्रकार और निगर्वी व्यक्तित्व – रामभाऊ जोशी : डॉ. विश्वनाथ दा. कराड

निःस्पृह पत्रकार और निगर्वी व्यक्तित्व – रामभाऊ जोशी : डॉ. विश्वनाथ दा. कराड

एमआईटी में रामभाऊ जोशी – जीवन प्रवास” चरित्र ग्रंथ का विमोचन

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे,: “पत्रकारिता के प्रदीर्घ पर्व का नाम रामभाऊ जोशी है. सात दशकों का उनका काल आदर्श, अभ्यासपूर्ण और स्वस्थ था. पत्रकारिता ही उनका श्वास और ध्यास थी. उनकी पहचान एक निःस्पृह पत्रकार और निगर्वी व्यक्तित्व के रूप में थी,” ऐसे विचार माईर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने व्यक्त किए.

 

अनिल जोशी लिखित “रामभाऊ जोशी – जीवन प्रवास” इस चरित्र ग्रंथ का प्रकाशन डॉ. विश्वनाथ दा. कराड के हाथों एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में किया गया. इस अवसर पर अध्यक्षीय भाषण में वे बोल रहे थे. ज्येष्ठ गांधीवादी विचारवंत डॉ. उल्हासदादा पवार और रामभाऊ जोशी के भाई तथा इस चरित्र ग्रंथ के लेखक अनिल जोशी प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे.

 

इस अवसर पर एमआईटी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. एस. एन. पठाण, प्रो. डॉ. मिलिंद पात्रे, विश्वास जोशी, संवित पेंडसे, पश्यंती जोशी, उज्ज्वला भालेराव, राधा जोशी, चैतन्य जोशी, ऋता कांटे, आनंद जोशी, स्नेहा जोशी, अजित जोशी, स्वाती जोशी उपस्थित थे.

 

प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “रामभाऊ एक उत्तम पत्रकार, कुशल संगठक, लेखक, नाट्य संगीत के जानकार, आस्वादक और कार्यकर्ता थे. सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में वे सक्रिय थे. सेनापति बापट मार्ग पर पत्रकार नगर की स्थापना में उनकी सक्रिय भूमिका थी. हंसमुख, हाजिरजवाबी, निगर्वी रामभाऊ होनहार पत्रकारों के मार्गदर्शक थे.”

 

डॉ. उल्हासदादा पवार ने कहा, “सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र में रामभाऊ ने पत्रकारिता के सात दशकों में कई बदलाव देखे. लेकिन निःस्पृह और बेबाक तरीके से वे टिप्पणी करते रहे. ऐसी पत्रकारिता की आज जरूरत है.”

 

अनिल जोशी ने कहा, “बुद्धिमान, प्रेमळ, जानकार, निरपेक्ष, व्यासंगी जैसे अनेक गुणों वाले व्यक्तित्व का मुझे भाई के रूप में मिलना और उनके चरित्र लेखन का अवसर मिलना, इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं. उनका चरित्र कई पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगा.”

 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. भागवत बिरहाड़ी ने किया और आभार डॉ. महेश थोरवे ने माना.

 

 

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