
आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
विश्वास उटगी ने फैसले को बताया अर्थव्यवस्था के लिए जोखिमपूर्ण, गोपालदादा तिवारी ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर साधा निशाना
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे:। आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था के हितों के प्रतिकूल बताया है। बैंकिंग अर्थशास्त्री एवं बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व निदेशक विश्वास उटगी ने आरोप लगाया कि लाभ की स्थिति में आ चुकी आईडीबीआई बैंक को विदेशी निवेशकों के नियंत्रण में देना देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए जोखिमपूर्ण है।
आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री के मुद्दे पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में उटगी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों ने देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद कृषि, उद्योग और आम नागरिकों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में इन संस्थानों का योगदान रहा है। ऐसे में राष्ट्रीयकृत बैंक की हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को सौंपने के निर्णय पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।
उटगी ने दावा किया कि आईडीबीआई बैंक की बिक्री को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि बैंक में विदेशी निवेश की सीमा से संबंधित निर्णय संसद में लिए गए थे। उनके अनुसार, वर्तमान प्रक्रिया में संसद की भूमिका और सार्वजनिक हित के पहलू पर स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कांग्रेस द्वारा आंदोलन किए जाने की भी बात कही।
उटगी ने आईडीबीआई बैंक की बिक्री से जुड़ी प्रस्तावित राशि और बैंक की विभिन्न संपत्तियों के मूल्य को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बैंक की बिक्री 52,758 करोड़ रुपये में तय होने की बात सामने आई है, जबकि पुणे, मुंबई, हैदराबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बैंक की जमीन और अन्य संपत्तियों का मूल्य इससे काफी अधिक है। हालांकि, संपत्तियों के मूल्य संबंधी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
तिवारी ने आर्थिक नीतियों पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विदेशी निवेश और आर्थिक जरूरतों का हवाला देकर सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है। उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक को वित्तीय संकट से उबारने के लिए सरकार और एलआईसी की ओर से बड़ी राशि लगाई गई थी। अब बैंक की स्थिति में सुधार और लाभ में आने के बाद उसकी हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों को देने का निर्णय सवाल खड़े करता है।
तिवारी ने आईडीबीआई बैंक के शेयर मूल्य को लेकर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि करीब 90 रुपये के शेयर को लगभग 81 रुपये में बेचने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे सार्वजनिक संपत्ति के उचित मूल्यांकन और आम नागरिकों के हितों के संदर्भ में गंभीर विषय बताया।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों की भूमिका और राष्ट्रीय आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।

