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इंटेरियो बाई गोदरेज के अध्ययन के अनुसार, 77% विद्यार्थियों को कक्षा में बैठने में परेशानी, आरामदायक और शरीर के अनुकूल फर्नीचर पर जोर

इंटेरियो बाई गोदरेज के अध्ययन के अनुसार, 77% विद्यार्थियों को कक्षा में बैठने में परेशानी, आरामदायक और शरीर के अनुकूल फर्नीचर पर जोर

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान मुंबई महाराष्ट्र 

मुंबई, : गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के प्रमुख फर्नीचर ब्रांड ‘इंटेरियो बाई गोदरेज’ ने अपना नवीनतम अध्ययन जारी किया है। “स्क्रीन्स, सीटिंग एंड स्ट्रेन: रीथिंकिंग स्टूडेंट हेल्थ थ्रू एर्गोनॉमिक्स” शीर्षक वाला यह अध्ययन गैजेट्स के उपयोग, लंबे समय तक बैठने, क्लासरूम की बनावट और छात्रों के स्वास्थ्य के बीच संबंध की पड़ताल करता है। पूरे भारत के 1,000 कॉलेज छात्रों पर किए गए इस अध्ययन में मांसपेशियों व जोड़ों के दर्द (मस्कुलोस्केलेटल डिस्कम्फर्ट), आँखों पर तनाव और सुस्त जीवनशैली (लंबे समय तक बैठे रहने की आदत) की समस्या को उजागर किया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि शरीर के अनुकूल फर्नीचर और जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले पढ़ाई के माहौल से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, पढ़ाई में उनकी भागीदारी और शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

 

 

 

अध्ययन के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए इंटेरियो बाई गोदरेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ बी2बी बिजनेस, समीर जोशी ने कहा, “तकनीक विद्यार्थियों के पढ़ने और सीखने के तरीके को लगातार बदल रही है। ऐसे में उन जगहों पर भी नए सिरे से विचार करना जरूरी है, जहां वे पढ़ाई करते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना, स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल और कक्षाओं में पारंपरिक फर्नीचर शारीरिक परेशानी पैदा कर सकते हैं और विद्यार्थियों की एकाग्रता को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि शिक्षण संस्थानों में एर्गोनॉमिक्स यानी शरीर की जरूरतों के अनुरूप फर्नीचर और व्यवस्था को अहमियत देना जरूरी है। इंटेरियो बाई गोदरेज में हमारा मानना है कि पढ़ाई के माहौल को अधिक लचीला, आरामदायक और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि वे बेहतर ढंग से सीख सकें और उनका समग्र स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहे।”

 

 

 

यह श्वेतपत्र (व्हाइटपेपर) पारंपरिक क्लासरूमों में छात्रों की बढ़ती असुविधा की ओर ध्यान दिलाता है। अध्ययन के अनुसार, 77% छात्रों ने बैठने की व्यवस्था को असुविधाजनक बताया, जिसका मुख्य कारण डेस्क और कुर्सी के बीच सही दूरी न होना, कुशन की कमी और अनुचित ऊंचाई का तालमेल है। इसके अलावा, 55% से अधिक छात्र आज भी लकड़ी की पारंपरिक बेंचों और डेस्क का उपयोग कर रहे हैं। वहीं 61% छात्र लंबे समय तक बैठे रहने को अपने दर्द का मुख्य कारण मानते हैं, जबकि केवल 7% छात्र ही यह पहचान पाते हैं कि फर्नीचर से सही सपोर्ट न मिलना भी इसकी एक बड़ी वजह है।

 

रिसर्च से यह भी पता चलता है कि छात्र लंबे समय तक लगातार बैठे रहते हैं: 65% छात्र बिना किसी ब्रेक के 1-1 घंटे की कक्षाएं लेते हैं और 15% छात्र लगातार 2 से 4 घंटे तक कक्षाओं में बैठते हैं। औसतन,छात्र रोजाना

 

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