
आलू खराब निकलने के विवाद में मुनीम का हाथ टूटा, मुकदमा दर्ज
घटना को लेकर उठे सवाल, दोनों पक्षों को सुनकर समाधान की जरूरत
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान जसवंतनगर इटावा
जसवंतनगर/ इटावा। थाना क्षेत्र के फुलरई स्थित साईं कोल्ड स्टोर में आलू खराब निकलने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि आलू छुड़ाने पहुंचे दो लोगों ने कोल्ड स्टोर के मुनीम के साथ मारपीट कर दी, जिससे उनका दाहिना हाथ टूट गया। पुलिस ने मुनीम की तहरीर पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थानाध्यक्ष कमल भाटी के अनुसार, अशोक नगर इटावा निवासी देवकी नंदन पुत्र स्वर्गीय दयाराम साईं कोल्ड स्टोर में मुनीम हैं। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 21 अक्टूबर को मैनपुरी जिले के करहल थाना क्षेत्र के एहलादपुर निवासी नवरतन सिंह पुत्र लज्जाराम और विवेक यादव अपने आलू छुड़ाने पहुंचे थे।
आरोप है कि आलू खराब निकलने को लेकर दोनों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर मुनीम के साथ मारपीट की गई, जिसमें उनका दाहिना हाथ टूट गया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर दोनों ने जान से मारने की धमकी दी। घटना के समय कोल्ड स्टोर में अन्य लोग भी मौजूद थे। सूचना पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची।
आलू खराब होने पर भी उठ रहे सवाल
घटना में मारपीट और मुनीम का हाथ टूटना गंभीर मामला है। किसी भी विवाद को मारपीट तक पहुंचना उचित नहीं है। हालांकि, इस पूरे मामले में एक सवाल यह भी उठता है कि कोल्ड स्टोर में रखा आलू खराब कैसे हुआ?
किसान कोल्ड स्टोरेज में अपना आलू सुरक्षित रखने के लिए शुल्क देते हैं। ऐसे में यदि आलू खराब निकलता है तो संबंधित किसान की नाराजगी और शिकायत के कारणों की भी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यह भी देखा जाना चाहिए कि आलू किस स्थिति में जमा किया गया था, भंडारण की अवधि कितनी थी और आलू खराब होने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा।
बताया गया है कि आलू खराब होने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी और गाली-गलौज हुई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए था। मारपीट में किसी का हाथ टूटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है।
दोनों पक्षों को सुनकर हो निष्पक्ष जांच
पुलिस ने फिलहाल मुनीम की तहरीर पर दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब जरूरत है कि पुलिस पूरे मामले में दोनों पक्षों की बात सुने और घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच करे। यदि दूसरे पक्ष की ओर से भी कोई शिकायत या कानूनन कार्रवाई योग्य आरोप सामने आता है तो उसका भी नियमानुसार परीक्षण किया जाना चाहिए।
अदालतों पर मुकदमों का बोझ भी चिंता का विषय
छोटे-छोटे विवाद जब लंबे समय तक मुकदमेबाजी में चले जाते हैं तो दोनों पक्षों का समय और धन खर्च होता है। अदालतों में पहले से लंबित मामलों का बोझ है और अनेक लोग वर्षों से अपने मामलों के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई मामलों में पक्षकारों को लगातार तारीखों पर अदालत जाना पड़ता है।
ऐसे में जहां कानून के तहत संभव हो और मामला आपसी बातचीत या प्रशासनिक स्तर पर समाधान योग्य हो, वहां दोनों पक्षों को सुनकर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने का प्रयास भी किया जाना चाहिए। हालांकि, गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार कार्रवाई होना जरूरी है।
इस मामले में भी मुख्य सवाल यही है कि आलू खराब क्यों हुआ, विवाद की शुरुआत कैसे हुई और मारपीट की स्थिति क्यों बनी? इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
न्याय केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि दोनों पक्षों को सुनकर तथ्य सामने लाना और कानून के अनुसार समयबद्ध समाधान की दिशा में प्रयास करना भी जरूरी है।



