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स्वच्छ प्रौद्योगिकी और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए भारत-स्वीडन सहयोग को बढ़ावा

स्वच्छ प्रौद्योगिकी और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए भारत-स्वीडन सहयोग को बढ़ावा

इंडिया–स्वीडन इनोवेशन्स एक्सेलेरेटर की 28वीं कार्यशाला में 60 से अधिक भारतीय और 7 स्वीडिश कंपनियों का सहभाग 

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र

पुणे,: स्वच्छ प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से ‘इंडिया–स्वीडन इनोवेशन्स एक्सेलेरेटर’ (आईएसआईए) की 28वीं कार्यशाला आज पुणे में आयोजित की गई। इसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और शाश्वतता के क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भारत में नवीन स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

 

आईएसआईए भारत और स्वीडन के बीच स्वच्छ प्रौद्योगिकी तथा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय पहल है। यह कार्यक्रम स्वीडिश एनर्जी एजेंसी के सहयोग से तथा बिजनेस स्वीडन – द स्वीडिश ट्रेड एंड इन्वेस्ट काउंसिल और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री – ग्रीन बिजनेस सेंटर (सीआईआई-जीबीसी) की साझेदारी में संचालित किया जाता है। इसके माध्यम से स्वीडिश कंपनियों को भारतीय बाजार में प्रवेश करने और भारतीय उद्योगों को पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियां अपनाने के अवसर मिलते हैं।

 

कार्यशाला में 60 से अधिक भारतीय और 7 स्वीडिश कंपनियों ने भाग लिया। इस दौरान ऊर्जा भंडारण, संसाधनों का कुशल उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डिजिटल समाधान और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों की नवीन प्रौद्योगिकियां प्रस्तुत की गईं।

 

आईएसआईए के माध्यम से अब तक 80 से अधिक उन्नत स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को भारतीय बाजार में प्रस्तुत किया गया है। इस पहल के अंतर्गत 250 से अधिक पायलट और व्यावसायिक परियोजनाओं को बढ़ावा मिला है, जबकि 50 से अधिक औद्योगिक साझेदारियां स्थापित हुई हैं। भारत के 1,500 से अधिक संबंधित हितधारक इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।

 

अगले वर्ष आईएसआईए के 15 वर्ष पूरे होंगे। इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारियों का विस्तार करना, स्वीडिश कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना तथा भारत के ऊर्जा परिवर्तन को गति देना है। नवाचार, व्यापार और निवेश के माध्यम से स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की औद्योगिक जरूरतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

कार्यशाला की शुरुआत इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) के पुणे चैप्टर की कोर कमेटी सदस्य तथा सस्टेन एंड सेव की निदेशक प्रणति श्रॉफ मुनोत के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि उद्योगों के दैनिक कामकाज में शाश्वतता के सिद्धांतों को अपनाना, संसाधनों का कुशल उपयोग करना और पर्यावरण अनुकूल उपायों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इस दिशा में संस्थाओं के बीच सहयोग और नवीन प्रौद्योगिकियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

 

स्वीडिश एनर्जी एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय बाजार विकास एवं निवेश विभाग के वरिष्ठ व्यवसाय विकास अधिकारी निल्स हेनोख ने आईएसआईए और इंडस्ट्री ट्रांजिशन पार्टनरशिप (आईटीपी) जैसी पहलों के माध्यम से भारत और स्वीडन के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन में स्वीडन की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा और शाश्वतता के क्षेत्र में दोनों देशों का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है।

 

बिजनेस स्वीडन के व्यापार आयुक्त एरिक ओदार ने भारत और स्वीडन के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे हासिल करने में स्वीडन की स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी संबंधी विशेषज्ञता उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने दीर्घकालिक सहयोग, स्थानीय निवेश और मजबूत व्यावसायिक साझेदारियों के महत्व को भी रेखांकित किया।

 

सीआईआई-ग्रीन बिजनेस सेंटर के प्रिंसिपल काउंसलर दिनेश घई ने अपने समापन संबोधन में कहा कि शाश्वतता से जुड़े लक्ष्यों को ठोस कार्यों में बदलना आवश्यक है। इसके लिए प्रभावी प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने भाग लेने वाली कंपनियों से संयुक्त परियोजनाओं और व्यावसायिक सहयोग के अवसर तलाशने का आह्वान किया।

 

कार्यशाला में सी-ग्रीन, ड्रुप्स, ईकैप्स, इलॉनरोड, एन्क्लिमा सॉल्यूशंस, होलीवोल्ट और पाइपगार्ड जैसी स्वीडिश कंपनियों ने अपनी प्रौद्योगिकियां प्रस्तुत कीं। इसके बाद आयोजित संवादात्मक सत्रों और बिजनेस-टू-बिजनेस (बीटूबी) बैठकों में भारतीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान, पायलट परियोजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

 

इस अवसर पर ईकैप्स और पाइपगार्ड द्वारा आईएसआईए कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा भी की गई। भारतीय बाजार में अवसरों की पहचान करने और अपनी व्यावसायिक उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में इन कंपनियों की प्रगति को रेखांकित किया गया।

 

स्वीडन की नवीन प्रौद्योगिकियों और भारत के औद्योगिक क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आईएसआईए की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। यह पहल शाश्वत आर्थिक विकास, औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण अनुकूल भविष्य के निर्माण के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

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