
इटावा में ‘रश्मिरथी’ का नाट्य मंचन, कर्ण के संघर्ष और स्वाभिमान ने दर्शकों को किया भावविभोर
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ पर आधारित नाटक का इटावा में मंचन किया गया। उत्तर प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, भारतेंदु नाट्य अकादमी और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, त्याग, स्वाभिमान और मित्रता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह-2026 के अवसर पर आयोजित नाट्य प्रस्तुति में पटना के प्रयास रंगमंडल के कलाकारों ने भाग लिया। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन मिथिलेश सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला वन अधिकारी (डीएफओ) अभिषेक अजीत इनामदार ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रस्तुति के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं ने नाटक को उत्साहपूर्वक देखा और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
कर्ण के जीवन संघर्ष और स्वाभिमान का सजीव चित्रण
‘रश्मिरथी’ में कर्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक भेदभाव, आत्मसम्मान, मानवीय संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा जैसे विषयों को उभारा गया। विपरीत परिस्थितियों में अपनी प्रतिभा और पराक्रम के बल पर पहचान बनाने वाले कर्ण के जीवन में आए संघर्षों को कलाकारों ने मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
नाटक में दुर्योधन के प्रति कर्ण की अटूट मित्रता, भगवान श्रीकृष्ण के प्रस्ताव, माता कुंती के साथ उनके भावनात्मक संवाद तथा इंद्र को कवच-कुंडल दान करने के प्रसंगों ने विशेष प्रभाव छोड़ा। कठिन परिस्थितियों में भी अपने वचन पर अडिग रहने वाले कर्ण के चरित्र के माध्यम से त्याग, दानवीरता और निष्ठा के मूल्यों को रेखांकित किया गया।
कर्म और चरित्र को बताया महानता का आधार
नाट्य प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति की महानता उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके कर्म, साहस, त्याग और चरित्र से निर्धारित होती है। कर्ण के जीवन की घटनाओं के माध्यम से दर्शकों को आत्मसम्मान, मित्रता और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के महत्व से परिचित कराया गया।
इस आयोजन के माध्यम से भारतीय साहित्य की कालजयी रचनाओं और रंगमंच की परंपरा को सामने लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के विभिन्न अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।


