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खौफ के साए में देश की जनता विपक्ष के दुष्प्रचार का परिणाम

खौफ के साए में देश की जनता विपक्ष के दुष्प्रचार का परिणाम

 

कोविशील्ड रिएक्शन ने चुनाव का इंतजार क्यों किया

विक्रांत अरूण 

भारत में चुनाव 2024 के अंतर्गत जहां एक और विपक्ष द्वारा कोविशील्ड टीके के रिएक्शन को लेकर देश की जनता में फैलाई गई भ्रामक जानकारी के तहत चुनाव में लाभ लेने के उद्देश्य से ओछी मानसिकता का परिचय दिया है तो वहीं दूसरी ओर डब्लू एच ओ द्वारा विपक्ष की इस भ्रामक दलील का खानदान तो अवश्य किय गया है परंतु भारतीय चुनाव आयोग द्वारा अपनी नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के विरुद्ध अपराधिक मुकदमा पंजीकृत ना करवा करके जनहित के लिहाज से लापरवाही एवं असंवेदनशीलता का ही परिचय प्रस्तुत किया है जो निंदनीय माना जाएगा ।

गौरतलब है कि कोविशील्ड के टीके को यदि रिएक्शन करना होता तो चुनाव तक इंतजार क्यों करता आखिर रिएक्शन की भ्रामक जानकारी का विस्फोट चुनाव से पहले क्यों नहीं हुआ यह विचारणीय विषय है विपक्ष द्वारा जिस कदर चुनावी लाभ लेने हेतु कोविशील्ड को लेकर के देश की जनता में भ्रामक जानकारी फैलाई गई परंतु यह नहीं सोचा गया कि यदि भविष्य में कोरोना महामारी जैसी दूसरी महामारी का प्रकोप होता है तो विपक्ष द्वारा फैलाई गई इस भ्रामक जानकारी के चलते आम जनमानस द्वारा डर के चलते टीके ना लगवाने से महामारी को नियंत्रित करने कितनी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा भारत सरकार को क्योंकि देश की तमाम जनता अर्थात भारत की आधी आबादी अशिक्षित है जो विपक्ष द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी का शिकार होकर महामारी को गले लगा लेगी तब उन सभी जिम्मेदार विपक्ष को ही ठहराया जाएगा हालाकि की तब भी विपक्ष उसे जहां हानि पर अपने सियासत की रोटियां सेंकने से बाज नहीं आएगा जिसका दुष्परिणाम समूचे भारत की जनता को झेलना पड़ सकता है विपक्ष को कोविशील्ड टीके के रिएक्शन को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने से पहले इन तथ्यों पर गौर करना चाहिए था परंतु स्वार्थी विपक्ष चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से यह भूल गया कि इस तरह की भ्रामक जानकारी भविष्य में जनहानि का कारण बन सकती है ।

कोविशील्ड पर भ्रामक जानकारी फैलाने से पहले विपक्ष को यह गारंटी देश की जनता को देना चाहिए था कि भविष्य में अब कोरोना जैसी महामारी नहीं आएगी और यदि आई भी तो टीके लगवाने से रिएक्शन का डर नहीं रहेगा देश की भोली भाली जनता बेवकूफ बनाकर विपक्ष अपना उल्लू जरूर सीधा कर सकता है परंतु भविष्य में आने वाली महामारी से देश की जनता को कैसे बचा पाएगा इस बात का भी उल्लेख करना चाहिए था ब्रह्म जानकारी फैलाने के साथ-साथ किंतु विपक्ष द्वारा ऐसा कछ नहीं जो भविष्य में एक बड़ी जन हानि का कारण बन सकता है चूंकि देश आधे से अधिक कम पढ़ी-लिखी जनता में कोविशील्ड के तक को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी के चलते खौफ के साए में पहुंच चुकी है अर्थात देश की जनता के जेहन से विपक्ष द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी के खौफ से तत्काल बचाया जाना अथवा उबरा जाना आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है और यह जिम्मेदारी नैतिक रूप से डब्लू एच ओ एवं भारतीय चुनाव आयोग की नैतिक जिम्मेदारी है जिससे यह दोनों संस्थाएं बच नहीं सकती हैं इन दोनों संस्थाओं द्वारा विपक्ष द्वारा फैलाई भ्रामक जानकारी के आधार पर विपक्ष पर ठोस एवं कड़ी कार्यवाही करते हुए सबक सिखाना कर जनता को विश्वास में लेना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसी ओछी एवं गंदी राजनीति करने से बाज आए ।

जबकि लब्बोलुआब यह है कि डब्लू एच ओ एवं भारतीय चुनाव आयोग द्वारा विपक्ष की इस ओछी हरकत किसी प्रकार की कार्यवाही न किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है इससे साबित होता है कि भारतीय चुनाव आयोग अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाने में पूर्णतः असफल रहा है साथ-साथ डब्लू एच ओ की भी घोर लापरवाही दृष्टिगत है हालांकि जो भी है परंतु देश की जनता के मध्य व्याप्त कोविशील्ड टीके के ख्वाब से मुक्त किया जाना आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है अन्यथा की स्थिति में विपक्ष द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी का भयावह दुष्परिणाम साबित हो सकता है एक बड़ी जन हानि के रूप में अतः इस इस तथ्य को ध्यान में रखकर विचार करें भारतीय चुनाव आयोग तो अच्छा होगा।

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