पूणे

माईर्स एमआईटी शिक्षा समूह और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा ‘मेल टू महात्मा’ अनुरोध पत्र की अभिनव पहल

माईर्स एमआईटी शिक्षा समूह और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा ‘मेल टू महात्मा’ अनुरोध पत्र की अभिनव पहल

विश्व शांति के लिए सभी राष्ट्राध्यक्ष, यूनेस्को और यूएनओ से करेंगे अपील

 

पुणे,: विश्व शांति एक सापेक्ष शब्द है. बीसवीं सदी में वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढावा देने के लिए कई विचारधाराएँ उभरी है. लेकिन गांधीवादी मॉडल विश्व शांति के लिए एक व्यवहार्य विकल्प है. इस मुख्य सूत्र को आगे बढाते हुए ाइर्स एमआईटी शिक्षण संमूह और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा ‘मेल टू महात्मा’ अनुरोध पत्र की अभिनव पहल शुरू करेंगे. इस समूह के इस समूह के २७ हजार छात्रों और ३ हजार शिक्षण और गैर शिक्षण कर्मचारियों ने संयुक्त राष्ट्र,यूनेस्को और संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन,रूस, जर्मनी, जापान सहित दुनिया भर के अन्य सभी प्रमुख देशों के राष्ट्रध्यक्षों को पत्र लिखने का संकल्प लिया है.

इसमें यह उल्लेख किया जाएगा कि महात्मा गांधीजी के विचारों को लागू करे. हमें रक्तपात और सीमा विवाद को रोकने तथा शांति स्थापित करने की पहल करनी चाहिए. इसके लिए माइर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी एवं मानवता के पुजारी प्रो. डॉ. विश्वनाथ ने सभी से अपील की है.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ७८वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने यह संकल्प किया.

इस अवसर पर डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस, प्र कुलपति डॉ.मिलिंद पांडे, डॉ. संजय उपाध्ये, प्रो. दत्ता दंडगे, डॉ. मिलिंद पात्रे, डॉ. महेश थोरवे सहित विद्यार्थी परिषद के सभी पदाधिकारी, एमआईटी डब्ल्यूपीयू विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष पृथ्वीराज शिंदे, प्रसाद शिंदे, आर्य दीवान, प्रशांत मानव और सैकड़ों छात्र उपस्थित थे.

डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, म. गांधीजी निरंतर आत्म परीक्षण में लगे रहते थे. उनके विचारों को जीवन में लाना आवश्यक है. अब उनके सिद्धांतों पर विचार करने का समय आ गया है. वैश्वीकरण के युग में वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रगति हुई. यही कारण है कि भौतिक सुख सुविधाओं की दौड़ जारी है. ऐसे समय में अज्ञानता, अहंकार और स्वार्थ के कारण अराजकता, आतंकवाद, रक्तपात आदि भी बढ़ता हुए दिखाई दे रहा है. इसलिए यह भय है कि हम २१वीं सदी का अंत देखेंगे या नहीं.

विश्वविख्यात कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉ. विजय भटकर ने ११वें शांति सम्मेलन के अवसर पर ‘मेल टू महात्मा’ शीर्षक से एक लेख लिखा था. इससे प्रेरित होकर विश्व शांति के दूत महात्मा गांधी की ७८ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की.

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