सीतामढ़ी

बाल श्रम से विमुक्त हुए बच्चे ने मैट्रिक परीक्षा में हासिल की सफलता

बाल श्रम से विमुक्त हुए बच्चे ने मैट्रिक परीक्षा में हासिल की सफलता

 

सीतामढ़ी: कभी बचपन मजदूरी में बीता, लेकिन अब किताबों से दोस्ती कर सफलता की नई इबारत लिख दी। संदीप कुमार, मात्र 10 वर्ष की उम्र में बाल श्रम करने को मजबूर था, को श्रम संसाधन विभाग की धावा दल टीम और पुलिस संयुक्त रूप अभियान चलाकर विमुक्त कराया। इस वर्ष, उसने मैट्रिक परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने सपनों को नई उड़ान दी है। आर्थिक तंगी के कारण संदीप को स्कूल छोड़कर काम करना पड़ा था, लेकिन जिला प्रशासन और प्रथम संस्था की मदद से उसे दोबारा शिक्षा से जोड़ा गया। कठिनाइयों के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी और इस साल मैट्रिक परीक्षा में सफलता हासिल की। जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने उसे शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो कोई भी बच्चा अपने भविष्य को बेहतर बना सकता है। श्रम अधीक्षक रमाकांत ने बताया कि विमुक्त कराने के बाद संदीप का नाम चाइल्ड लेबर ट्रैकिंग सिस्टम में दर्ज किया गया और मुख्यमंत्री राहत कोष से 25,000 रुपये की सावधि जमा कराई गई। प्रथम संस्था के जिला समन्वयक सुधीर कुमार ने बताया कि संस्था के स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम के तहत संदीप को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, साथ ही उसका नियमित फॉलो-अप किया गया और उसे शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा।

 

संदीप ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, जिला प्रशासन और प्रथम संस्था को दिया, जिन्होंने उसे शिक्षा के मार्ग पर लौटने में मदद की। उसकी इस उपलब्धि से न केवल उसके परिवार में खुशी की लहर है, बल्कि यह अन्य वंचित बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।संदीप की सफलता पर जिलाधिकारी रिची पाण्डेय, श्रम अधीक्षक रमाकांत, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी श्वेता कुमारी, प्रथम संस्था के जिला समन्वयक सुधीर कुमार, बीरेंद्र कुमार सहित धावा दल के सभी सदस्यों ने उसकी सराहना की और आगे की पढ़ाई के लिए हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

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