
महाराष्ट्र की 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में रक्षा उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका – शुभम गुप्ता
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में रक्षा उत्पादन क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य में रक्षा उत्पादन उद्योग को बढ़ावा देने के साथ नवाचार, अनुसंधान एवं स्वदेशीकरण को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे देश की रक्षा क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ राज्य के उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। यह बात पश्चिम महाराष्ट्र विकास महामंडल के प्रबंध निदेशक शुभम गुप्ता ने कही।
श्री गुप्ता भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से विभागीय आयुक्त कार्यालय, पुणे में आयोजित ‘रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता’ विषयक राष्ट्रीय स्तरीय क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर मराठा चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर के निदेशक सुधन्वा कोपर्डीकर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि चेतन धारिया, रक्षा विभाग के ब्रिगेडियर विरेश, उद्योग विभाग के सह निदेशक संदीप रोकड़े, महाप्रबंधक अर्चना कोठारी, उद्योग संचालनालय के अधिकारी तथा पुणे, सातारा, सोलापुर, कोल्हापुर और सांगली जिलों के बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित थे।
शुभम गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप महाराष्ट्र में रक्षा क्षेत्र के उत्पादन, प्रौद्योगिकी विकास और आधुनिक उपकरणों के निर्माण को गति मिल रही है। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने से राज्य के उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों से रोजगार सृजन, निवेश वृद्धि और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, जिससे महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति को नया बल मिलेगा। केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और निजी उद्योगों के समन्वय से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को और मजबूत करना राज्य सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने उद्यमियों से राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यशाला में सुधन्वा कोपर्डीकर, चेतन धारिया और ब्रिगेडियर विरेश ने घटक-स्तरीय उत्पादन, नवाचार और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, क्षेत्रीय आधारभूत संरचना के विस्तार तथा उद्योग क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में पुणे संभाग के रक्षा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, घटक निर्माताओं और अन्य हितधारकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

