
ये देख लीजिए सरकार.. बिहार में स्कूली बच्चों के लिए ऑटो-टोटो तो बंद कर दिए, परेशानी का निदान कौन करेगा?
बिहार: कुणाल किशोर: ली बच्चों के सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. 1 अप्रैल से स्कूली बच्चे ऑटो रिक्शा और टोटो रिक्शा के जरिए ना तो स्कूल जा सकेंगे ना ही स्कूल से घर आ सकेंगे. ऐसे में भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों और पेरेंट्स को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. विकल्प के अभाव में छात्र ऑटो और टोटो से घर लौटने को मजबूर हैं.
सरकार के फैसले का राजधानी पटना में व्यापक असर देखने को मिला. स्कूल प्रशासन ने जहां हाथ खड़े कर दिए, वहीं पेरेंट्स भी मजबूर दिख रहे थे. विशाल समाचार की टीम जब एक प्राइवेट स्कूल के बाहर का दौरा किया तो वहां हालात अफरा-तफरी का माहोल था.
जिन बच्चों के माता-पिता के पास प्राइवेट गाड़ी थी, वह तो आसानी से घर के लिए निकल रहे थे. लेकिन जिनके माता-पिता के पास निजी गाड़ी नहीं थी उनके लिए परेशानी अधिक थी. वह इधर-उधर भटकते दिख रहे थे. पुलिस की सख्ती के चलते ऑटो और टोटो रिक्शा चालक बच्चों को बिठा नहीं रहे थे.
ऑटो-टोटो है बच्चों का सहारा : आपको बता दें कि पटना में लगभग 4000 ऑटो और टोटो पर रिक्शा है. बिहार में 25000 से अधिक प्राइवेट स्कूल हैं, जहां बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं. तमाम स्कूलों के पास बसों की संख्या इतनी नहीं है कि वह छात्रों को घर से ला सकें और घर पहुंचा सके. आज भी पेरेंट्स या तो अपने बच्चों को रिक्शा से घर ले जा रहे हैं या फिर ऑटो या टोटो रिक्शा का सहारा ले रहे हैं. पेरेंट्स को कोई विकल्प नहीं दिख रहा है.
रोजी-रोटी कैसे चलेगी ? : विशाल समाचार संवाददाता कुणाल किशोर ने जब आटो रिक्शा ड्राइवर राजेश से बात की तो उनका कहना था कि हमने बच्चों को बिठा लिया है, लेकिन जब यह कानून के खिलाफ है तो मैं इन्हें उतार देता हूं. वैसे राजेश की चिंता इस बात को लेकर भी थी कि अब उनकी रोजी-रोटी कैसे चलेगी.