
“डू इट युअर सेल्फ“ आत्म-शिक्षा का सर्वोत्तम तरीका है – डॉ. सुभाष पवार
पुणे: विभिन्न शिक्षण विधियों में से “डु इट युअर सेल्प” (डीआयवाय) आजीवन सीखने की और आत्म शिक्षा की सबसे प्रभावी विधि है, ऐसा मत प्रसिद्ध प्रोफेसर, लेखक और कलाकार डॉ. सुभाष पवार व्यक्त किया। जी. एच. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के छात्रों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की दो दिवसीय प्रदर्शनी के चौथे संस्करण के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर जी. डॉ. एच. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, पुणे कैंपस डायरेक्टर आर. डी. खराडकर, सुरभि प्रणव और बी.टेक प्रथम वर्ष की डीन डॉ. वंदना धुरेजा उपस्थित थे।

डॉ. सुभाष पवार ने कहा कि स्वयं करो (“डु इट युअर सेल्प”) पद्धति सहयोगात्मक शिक्षण के अवसर प्रदान करती है। इंजीनियरिंग और कला संकाय पूरक कौशल वाले विषय हैं। इंजीनियरों में रचनात्मक कौशल होना चाहिए। दुनिया आपके सामने कई चुनौतियां पेश करेगी, लेकिन अगर आप अपना लक्ष्य निर्धारित करेंगे और कड़ी मेहनत करेंगे, तो आप सफल होंगे।
डीआयवाय क्लब के तहत छात्रों ने पोस्टर, चित्र, खाद्य पदार्थ, फोटो, शिल्प जैसी कलाकृतियां बनाईं। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति में परिकल्पित रचनात्मकता और डिजाइन लक्ष्यों को बढ़ावा मिल रहा है।

रायसोनी कॉलेज के कैम्पर निदेशक डॉ. आर. डी. खराडकर ने छात्रों की नवीनता और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने छिपी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए डिजिटल कला का उपयोग करने के लिए छात्रों की प्रशंसा की।
रायसोनी एजुकेशन के चेयरमैन श्री सुनील रायसोनी और रायसोनी एजुकेशन के कार्यकारी निदेशक श्री श्रेयस रायसोनी ने इंजीनियरिंग शिक्षा में नई शिक्षण प्रतिभा के उपयोग की सराहना की।



