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इटावा में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए आपदा प्रबंधन पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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इटावा में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए आपदा प्रबंधन पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

 

इटावा, उत्तर प्रदेश: विशाल समाचार 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 10 सूत्रीय एजेंडे के अंतर्गत आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं का नेतृत्व और व्यापक सहभागिता को केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, इटावा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

इस कार्यक्रम का आयोजन अपर जिलाधिकारी इटावा अभिनव रंजन श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें जनपद की सैकड़ों महिला स्वयं सहायता समूहों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य:

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला समूहों को आपदा की स्थिति में सजग, सशक्त और प्रशिक्षित बनाना था, जिससे वे न केवल स्वयं की रक्षा कर सकें बल्कि अपने समुदाय की भी मदद कर सकें।

प्रमुख प्रशिक्षण बिंदु:

जिला अग्निशमन अधिकारी सनद कुमार पटेल ने त्वरित अग्निशमन तकनीकों की जानकारी दी।

एसडीआरएफ आगरा से आए प्रशिक्षक सब-इंस्पेक्टर नर्वदेश्वर मिश्रा ने CPR (हृदय गति पुनःस्थापन तकनीक) एवं अग्नि सुरक्षा पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

आपदा विशेषज्ञ अवनीश दुबे ने राज्य और केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत योजनाओं और स्थानीय आपदाओं से निपटने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला।

सर्प मित्र आशीष त्रिपाठी ने सर्पदंश की स्थिति में बचाव, प्राथमिक उपचार और विषैले-गैरविषैले सर्पों की पहचान विषय पर महिलाओं को विशिष्ट जानकारी प्रदान की।

सम्मान एवं सहभागिता:

 

कार्यक्रम के समापन पर मनोज श्रीवास्तव, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि द्वारा अतिथि प्रशिक्षकों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

इस अवसर पर निम्न अधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे:

 

अवनीश दुबे (जिला आपदा विशेषज्ञ)

राना बेगम (आपदा लिपिक)

सनद कुमार पटेल (जिला अग्निशमन अधिकारी, इटावा)

प्रदीप कुमार यादव, विजेंद्र बाबू, कांस्टेबल अमरजीत यादव (एसडीआरएफ आगरा)

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. पीयूष दीक्षित द्वारा किया गया।

महत्वपूर्ण संदेश:

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि यदि महिलाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण और नेतृत्व दिया जाए, तो वे न केवल खुद को बल्कि पूरे समुदाय को आपदा के समय प्रभावी ढंग से सुरक्षित रख सकती हैं।

 

 

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