
रूबी हॉल क्लिनिक के डॉक्टरों ने 35 दिन के शिशु की दुर्लभ रोबोटिक किडनी सर्जरी में कामयाबी हासिल की
●दा विंची तकनीक की मदद से की गई इस सर्जरी में शिशु की गंभीर किडनी ब्लॉकेज कोसफलतापूर्वक ठीक किया गया। यह दुनिया के सबसे छोटे बच्चों में से एक है जिसकी पेल्विक-यूरेटेरिक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन के लिए सर्जरी की गई।
● सर्जिकल रोबोट की सहायता से डॉक्टरों ने बेहद छोटे चीरे लगाकर सर्जरी की, जिससे दर्द कम हुआ, जटिलताएं घटीं और बच्चे को जल्दी ठीक होने में मदद मिली।
पुणे,: रूबी हॉल क्लिनिक, पुणे के डॉक्टरों की टीम ने 35 दिन के एक नवजात शिशु पर दुर्लभ रोबोटिक सर्जरी कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह शिशु मैंगलोर से लाया गया था और दोनों किडनियों में पेल्विक-यूरेटेरिक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इस स्थिति में किडनी से मूत्र का प्रवाह रुक जाता है, जिससे दर्द, सूजन और स्थायी किडनी डैमेज का खतरा होता है।
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. हिमेश गांधी ने किया, जो रूबी हॉल के रोबोटिक सर्जरी विभाग के निदेशक और प्रमुख यूरो-ऑन्को सर्जन हैं। उन्होंने उन्नत दा विंची रोबोटिक सिस्टम के माध्यम से यह बेहद जटिल ऑपरेशन उच्च सटीकता के साथ किया।
डॉ. गांधी ने कहा, “इतने छोटे बच्चे पर ऑपरेशन करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। अंग बहुत छोटे होते हैं, टिशू बहुत नाजुक होते हैं और गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। लेकिन रोबोटिक आर्म्स और किडनी ट्रांसप्लांट में उपयोग होने वाले विशेष उपकरणों की मदद से हमने ब्लॉकेज को हटाकर किडनी और ब्लैडर को सफलतापूर्वक जोड़ दिया। अब शिशु स्वस्थ हो रहा है और आराम से मूत्र त्याग कर रहा है।”
डॉ. गांधी के अनुसार, रोबोटिक सर्जरी से कई फायदे मिलते हैं, खासकर इतने संवेदनशील मामलों में। इससे छोटे चीरे लगते हैं, शरीर को कम नुकसान होता है और रोगी जल्दी ठीक होता है। दा विंची रोबोटिक सिस्टम की 3D तकनीक और नियंत्रण क्षमता सर्जरी को सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाती है। इस तकनीक की सहायता से 3D विज़ुअलाइज़ेशन और बढ़ी हुई निपुणता भी सर्जनों को सीमित स्थानों में भी स्पष्ट दृश्य और अधिक नियंत्रण प्रदान करती है। यह तकनीक न केवल शल्य प्रक्रिया को गति देती है, बल्कि जटिलताओं के जोखिम को भी कम करती है, जिससे यह जटिल प्रक्रियाओं के लिए बेहतर विकल्प बन जाती है, खासकर बाल चिकित्सा रोगियों में।

यह सर्जरी पुणे को रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक और अहम पड़ाव साबित हुई है। डॉ. गांधी ने 2017 में पुणे में पहली बार रोबोटिक तकनीक से यूरोलॉजिकल कैंसर की सर्जरी शुरू की थी। तब से अब तक उन्होंने 540 से अधिक रोबोटिक सर्जरी की हैं, जिनमें बच्चों से लेकर प्रोस्टेट और किडनी कैंसर से पीड़ित वयस्कों तक के ऑपरेशन शामिल हैं।
डॉ. गांधी ने बताया, “पिछले आठ वर्षों में पुणे ने रोबोटिक सर्जरी में शानदार प्रगति की है। मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के मुकाबले अब पुणे भी विशेषज्ञता और नतीजों में बराबरी पर है। अब मरीज इन मेट्रो शहरों की बजाय पुणे आ रहे हैं।”
सिर्फ सर्जरी ही नहीं, डॉ. गांधी अन्य शहरों के डॉक्टरों को भी रोबोटिक तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में रोबोटिक सर्जरी प्रोग्राम शुरू कराने में मदद की है।

