
संविधान की रक्षा के लिए बसपा प्रतिबद्ध – डॉ. हुलगेश चलवादी
पुणे,संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्दों को हटाने पर पुनर्विचार की बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से की गई थी। इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश महासचिव, पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन प्रभारी और पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने रविवार को कहा कि यह सुझाव संविधान की आत्मा पर सीधा आघात है।
डॉ. चलवादी ने स्पष्ट किया कि—”संविधान की दिशा और मूल तत्वों को बदलने का कोई भी प्रयास बहुजन समाज सहन नहीं करेगा। अब समय आ गया है कि जो लोग संविधान को बदलने की बात कर रहे हैं, उन्हें वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर सशक्त जवाब दिया जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि आरक्षण, समानता, सामाजिक न्याय और संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष अंतिम सांस तक जारी रहेगा। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में बसपा संविधान और बहुजन हितों को केंद्र में रखकर एक ठोस कार्यक्रम के साथ जनता के सामने जाएगी।
बसपा का आवाहन:
डॉ. चलवादी ने बहुजन समाज से अपील करते हुए कहा कि—”भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा रचित संविधान और उनके विचारों को सच्चे अर्थों में आगे बढ़ाने का कार्य बसपा कर रही है, इसलिए सभी बहुजन समाज के लोग बसपा के साथ खड़े हों।”
उन्होंने यह भी कहा कि—”संविधान ने ही देश के करोड़ों शोषित, पीड़ित, वंचित और उपेक्षित वर्गों को आत्मसम्मान के साथ जीने और अपने पैरों पर खड़े होने का अधिकार दिया है। यदि आरक्षण और अन्य संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं, तो बसपा भी सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगी।”
यह बात उन्होंने बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी के बयान के हवाले से कही। सुश्री मायावती ने स्पष्ट किया है कि—”भारतीय संविधान की मूल भावना की रक्षा और उस पर अमल करना बसपा का मुख्य उद्देश्य है।”
सत्ताधारियों पर गंभीर आरोप:
डॉ. चलवादी ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार ने संविधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर अल्पसंख्यकों और दलित समाजों पर अन्याय किया है। धार्मिक आयोजनों के नाम पर जातीय तनाव और हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं पर अत्याचार, अल्पसंख्यकों पर हमले, बेरोजगारी और महंगाई से आम जनता त्रस्त है—ऐसे तीखे आरोप सुश्री मायावती ने लगाए हैं।
भाषा पर भी चिंता:
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक भाषा थोपने की कोशिशों पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए सुश्री मायावती जी ने कहा कि—”देश की सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।”
अंत में, उन्होंने यह भी कहा कि—”संविधान की प्रभावी क्रियान्विति और सभी वर्गों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी लोकतांत्रिक दलों को एकजुट होना चाहिए।”

