पूणे

महाराष्ट्र तथा गोवा बार काउंसिल (बीसीएमजी) और पुणे बार एसोसिएशन की ओर से

महाराष्ट्र तथा गोवा बार काउंसिल (बीसीएमजी) और पुणे बार एसोसिएशन की ओर से

लोकतंत्र, सुशासन और शांति के लिए डॉ. राहुल कराड ‘एक्सलन्स अवार्ड’ से सम्मानित

 

पुणे: एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड को हाल ही में लोकतंत्र, सुशासन और शांति के क्षेत्र में किए अनुकरणीय कार्य के लिए महाराष्ट्र तथा गोवा बार काउंसिल और पुणे बार एसोसिएशन द्वारा ‘एक्सलन्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के अध्यक्ष एडवोकेट विठ्ठल बी. कोंडे-देशमुख और पुणे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट हेमंत डी. जांजद द्वारा प्रदान किया गया.

महाराष्ट्र तथा गोवा बार काउंसिल (बीसीएमजी) ने पुणे बार एसोसिएशन के सहयोग से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अभय एस. ओक के सम्मान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन कोथरूड स्थित एमआईटी डब्ल्यूपीयू के स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में किया गया. इस अवसर पर डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड को भी सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में देश भर से १५०० से अधिक न्यायाधीश, वकील और बैरिस्टर शामिल हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्वल भुयान बतौर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे. सर्वश्री जस्टिस महेश सोनक, संदीप मारणे, आरिफ एस.डॉक्टर, मुंबई उच्च न्यायालय के न्या. रेवती मोहिते-डेरे तथा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडियाचे अनिल सी.सिंह भी मौजूद थे.

सम्मान समारोह में डाॅ.राहुल वि.कराड ने कहा, राजनीति में शिक्षित नागरिकों का आना जरूरी है. देश में हजारों विधि निर्माता जातिवाद, भ्रष्टाचार और साम्यवाद जैसी चीजों को त्यागकर लोकतंत्र को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. शासन और राजनीतिक दलों में ठोस बदलाव कैसे लाया जाए, इस पर चर्चा जरूरी है. इसके लिए एमआईटी डब्ल्यूपीयू की पहल पर देश में पहली बार १८०० से अधिक विधायकों का सम्मेलन आयोजित किया गया.

न्यायमूर्ति उज्वल भुयान ने कहा, लोकतंत्र की नींव कानून का शासन है. इसके लिए स्वतंत्र न्यायपालिका जरूरी है. जिसमें ऐसे न्यायाधीश हों जो राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर फैसले ले सकें. लोकतंत्र में न्यायिक पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही महत्वपूर्ण है.

न्यायमूर्ति अभय ओक ने कहा, न्यायाधीशों की कम संख्या के कारण भारतीय न्यायपालिका में मामलों के निपटारे में देरी होती है. इस स्थिति को सुधारने के लिए विशिष्ट क्षेत्रों की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीशों की नियुक्ति की जानी चाहिए.

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