पूणे

ताल मृदुंग के साथ-साथ वाखरी में गूंजती‘येरे गड्या मैदानात’ की ध्वनि

ताल मृदुंग के साथ-साथ वाखरी में गूंजती‘येरे गड्या मैदानात’ की ध्वनि

पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे के विचार

श्री समर्थ विष्णुदास वारकरी कुश्ती महावीर स्पर्धा का उद्घाटन

पुणे” वारकरी समुदाय में ताल मृदुंग, जबकि वाखरी में येरे गड्या मैदानात की ध्वनि गूंजती है. यह केवल डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ही कर सकते है. उन्होंने पंढरपुर की मिट्टी में भक्ती और शक्ती का अनोखा संगम दिखाने वाली एक नई पीढी को खडा किया है. ये विचार पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशीलकुमार ने रखे.

विश्वशांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआईटी, श्री क्षेत्र आलंदी देहु पंढरपुर क्षेत्र विकास समिति के सहयोग से वाखरी में पालखी तल के पास विश्वशांति गुरूकुल क्षेत्र में वारकरी भक्तों के लिए आषाढीवारी के अवसर पर आयोजित श्री समर्थ विष्णुदास वारकरी कुश्ती महावीर प्रतियोगिता के उद्घाटन पर बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.

इस मौके पर हिंद केसरी पै. दीनानाथ सिंह विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री क्षेत्र आलंदी देहु पंढरपुर क्षेत्र विकास समिति के अध्यक्ष प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने निभाई.

 

 

साथ ही हभप तुलशीराम दा. कराड, प्रगतशील किसान काशीराम दा. कराड, महाराष्ट्र केसरी विष्णुतात्या जोशीलकर, महाराष्ट्र केसरी आप्पासाहेब कदम, डॉ.एस.एन.पठाण, शिवम गुरूजी, डॉ. विश्वजीत नागरगोजे, एमआईटी विश्वप्रयाग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.डॉ. गोपालकृष्ण जोशी, वारकरी कुश्ती महावीर प्रतियोगिता के संयोजन समितिके सचिव प्रो.विलास कथुरे एवं डॉ. टी.एन.मोरे उपस्थित थे.

इस अवसर पर संभाजीनगर के पहलवान आकाश डोंगे और सोलापुर के दादासोहन माने के बीच उद्घाटन कुश्ती मैच खेली गई.

सुशीलकुमार शिंदे ने कहा, पूरे विश्व को अपना घर मानने वाले डॉ. कराड ने अपनी उपलब्धियों के बल पर सभी धर्मो के साथ आदर्श संस्थाओं की स्थापना की है. वे अपना जीवन इस विचाराधारा के साथ जी रहे है कि हम सब एक है. उन्होंने समझा कि मनुष्य में ईश्वर का एक रूप है और जो वेद भी नही समझ पाए, उसे उन्होंने समझा और लोगों को ऊपर उठाया. वे निरंतर विश्व शांति के लिए प्रयास कर रहे है.

प्रो.डॉ.विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, मऊ मेणाहूनि आम्ही विष्णुदास कठीण वज्रास भेदू ऐसे, यही वारकरी संप्रदाय की रीति है. पर आज हमें यहां विष्णुदास और समर्थ के दर्शन हुए. साथ ही भक्ति और शक्ति का संगम भी दिखाई दे रहा है. ऐसे समय में हमें अहंकार की हवा को अपने मार्ग में नहीं आने देना चाहिए.

 

हिंद केसरी पै. दीनानाथ सिंह ने कहा, डॉ. विश्वनाथ कराड लाल मिटटी में कुश्ती को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने ज्ञान के सागर के साथ-साथ शक्ति की भी पूजा की है. यहां आए पहलवानों की वजह से इस लाल मिट्टी की खूबसूरती बढ गई है. उन्होंने इस क्षेत्र को नया जीवन भी दिया है.

प्रो.विलास कथुरे ने प्रस्तावना रखी. कार्यक्रम का सूत्रसंचालन हभप शालिकराम खंदारे ने किया.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button