
“वर्तमान तकनीक के युग में स्वास्थ्य जागरूकता आवश्यक” : अमृता फडणवीस
डॉ. अजय कोठारी और डॉ. अभिनव भुते लिखित ‘पाठ फिरवा पाठदुखीकडे’ पुस्तक के मराठी और अंग्रेजी संस्करण का विमोचन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे: “आज के तकनीक-केंद्रित युग में निवारक स्वास्थ्य देखभाल जरूरी है। डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता, लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, गलत तरीके से बैठना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर और गर्दन के दर्द की समस्याओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है,” यह विचार दिविजा फाउंडेशन की संस्थापक अमृता फडणवीस ने व्यक्त किए।
वे रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोगों के विशेषज्ञ डॉ. अजय कोठारी और डॉ. अभिनव भुते द्वारा लिखित ‘पाठ फिरवा पाठदुखीकडे’ पुस्तक के मराठी और अंग्रेजी संस्करण के विमोचन समारोह में बोल रही थीं।
इस अवसर पर संचेती अस्पताल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. पराग संचेती, उद्यमी सौरभ बोरा, मृणाल पवार, पुस्तक के दोनों लेखक, रमेश कोठारी सहित चिकित्सा क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अमृता फडणवीस ने कहा कि उपचार से अधिक प्रभावी रोकथाम होती है, लेकिन रोकथाम की शुरुआत जागरूकता से होनी चाहिए। स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए अपने शरीर को समझना तथा स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और निवारक देखभाल के लिए यह पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मृणाल पवार ने कहा कि आज की पीढ़ी लगातार तकनीक से जुड़ी हुई है, लेकिन अपने स्वास्थ्य से दूर होती जा रही है। रीढ़ की सेहत केवल दर्द के उपचार तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन में संतुलन, जागरूकता और बेहतर जीवनशैली से भी जुड़ा है। पुस्तक के माध्यम से दोनों विशेषज्ञ डॉक्टरों के करीब दो दशक के चिकित्सा अनुभव को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाया गया है।
डॉ. अजय कोठारी ने कहा कि गर्दन और कमर दर्द की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, शारीरिक गतिविधियों की कमी, व्यायाम का अभाव, गलत तरीके से बैठना और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण युवाओं में भी इन समस्याओं का प्रमाण तेजी से बढ़ रहा है। गंभीर समस्या बनने से पहले लोगों को इसके प्रति जागरूक होना और बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है।
मुख्य संबोधन में डॉ. पराग संचेती ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। उन्होंने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर जांच एवं उपचार कराने की अपील की। स्वस्थ शरीर के लिए उन्होंने अनुशासन, नियमित व्यायाम, उचित वजन, पर्याप्त आराम और मानसिक शांति को पांच मूलभूत सूत्र बताया।
कार्यक्रम का संचालन भूषण करंदीकर ने किया, जबकि डॉ. डिंपल कोठारी ने आभार व्यक्त किया।



