पूणे

भाषावाद से उपजा हिंसक वातावरण चिंताजनक — बसपा,नागरिकों की जान, संपत्ति और रोजगार की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए: डॉ. हुलगेश चलवादी

भाषावाद से उपजा हिंसक वातावरण चिंताजनकबसपा,नागरिकों की जान, संपत्ति और रोजगार की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए: डॉ. हुलगेश चलवादी

बहन मायावती जी ने जताई चिंता, केंद्र सरकार से की हस्तक्षेप की अपील

पुणे: भारत जैसे विविधता से परिपूर्ण और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में इन दिनों भाषा के आधार पर हो रहा राजनीति अत्यंत चिंताजनक रूप ले चुकी है। विशेषकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बीते कुछ समय से जो भाषिक विवाद उभरे हैं, उन्होंने न केवल संबंधित राज्यों में बल्कि देशभर में असुरक्षा और भय का वातावरण पैदा कर दिया है।

 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री बहन मायावती जी ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। इस संबंध में बसपा के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने मंगलवार (15 जुलाई) को पुणे में जानकारी देते हुए कहा कि — “धर्म, जाति, भाषा और प्रांतीय अस्मिता के आधार पर राजनीति करने वाली ताकतें देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। यह प्रवृत्ति अत्यंत घातक है और इस पर तात्कालिक व ठोस उपाय किए जाने की आवश्यकता है। बहुजन समाज पार्टी का स्पष्ट मत है कि देशहित में विघटनकारी प्रयासों को हर हाल में रोका जाना चाहिए।”

 

उन्होंने कहा कि राजनेताओं को देशभक्ति केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि उसे आचरण और व्यवहार में भी दिखाना चाहिए। दुर्भाग्यवश, आज कुछ राजनीतिक दल और उनके नेता समाज में खाई पैदा करने वाले मुद्दों को हवा दे रहे हैं, जिससे आम नागरिक भ्रमित हो रहा है और सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है।

 

डॉ. चलवादी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “हर भारतीय को देश की अस्मिता और लोकतंत्र पर गर्व होना चाहिए। हमें किसी भी प्रकार के विभाजनकारी एजेंडे के विरुद्ध संगठित होकर खड़ा होना चाहिए। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की बहुजन समाज पार्टी की नीति को अपनाकर ही हम स्थायी सामाजिक सौहार्द और समरसता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। महाराष्ट्र के सभी क्षेत्रीय दलों को भी यह विचारधारा अपनानी चाहिए।”

 

उन्होंने मुंबई जैसे महानगर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह शहर देशभर से आए हुए लाखों नागरिकों का साझा घर है। यहां कामगार, व्यापारी, विद्यार्थी, कर्मचारी—सभी वर्ग के लोग वर्षों से शांति और सौहार्द से रहते आए हैं। ऐसे में यहां कानून-व्यवस्था, समन्वय और शांति बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

 

डॉ. चलवादी ने कहा, “राज्य व केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे देशभर में रहने वाले प्रत्येक नागरिक की जान, संपत्ति और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्‍चित करें। अगर किसी भी प्रकार की भाषावादी या प्रांतीय मानसिकता के कारण लोगों की आजीविका या जीवन संकट में पड़ता है, तो यह संविधान और लोकतंत्र दोनों के विरुद्ध है।”

उन्होंने यह भी बताया कि सुश्री बहन मायावती जी ने केंद्र सरकार से इस मामले में संवेदनशीलता बरतने और आवश्यक हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि देशभर में किसी भी स्थान पर किसी नागरिक को उसकी भाषा, मूल स्थान या धार्मिक पहचान के कारण निशाना न बनाया जाए।

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