क्या सचमुच सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनने से पीछे हटीं? – बहस फिर तेज़
रिपोर्ट संपादकीय टीम विशाल समाचार
नई दिल्ली: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद को ठुकराने का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। हाल ही में एक टीवी चैनल पर प्रसारित चर्चा के दौरान कई राजनीतिक विश्लेषकों ने 2004 की उस घटना को याद किया, जब सोनिया गांधी ने बहुमत के बावजूद प्रधानमंत्री पद ग्रहण नहीं किया और डॉ. मनमोहन सिंह को आगे किया।
तथ्य क्या कहते हैं:भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो भारतीय नागरिक है, प्रधानमंत्री बन सकता है। सोनिया गांधी 1983 में भारतीय नागरिक बनीं, इसलिए उनके प्रधानमंत्री बनने में कोई कानूनी बाधा नहीं थी। 2004 में यूपीए को बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना, लेकिन उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया और डॉ. मनमोहन सिंह को यह ज़िम्मेदारी सौंपी।
राजनीतिक विवाद और आरोप:उस समय विपक्ष ने “विदेशी मूल” का मुद्दा उठाकर तीखी आपत्ति जताई थी। अब कुछ विश्लेषकों और राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि सोनिया गांधी का पद छोड़ना एक “राजनीतिक नाटक” था, जिससे जनता को भ्रमित किया गया। कुछ दावे यह भी करते हैं कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपनी भूमिका निभाई थी, हालांकि इस बात का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ी प्रमाण सामने नहीं आया।
विशेषज्ञों की राय:संवैधानिक जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति कलाम ने हमेशा अपनी भूमिका सीमित रखी और किसी भी निर्णय में संवैधानिक दायरे से बाहर नहीं गए। वहीं, राजनीतिक हलकों में यह धारणा भी प्रबल है कि कांग्रेस ने जानबूझकर यह रणनीति बनाई ताकि मनमोहन सिंह की स्वच्छ छवि का लाभ पार्टी को मिल सके।
नतीजा :सोनिया गांधी का प्रधानमंत्री पद छोड़ना अब भी रहस्य और बहस का विषय बना हुआ है। यह घटना भारतीय राजनीति के इतिहास का अहम हिस्सा है और समय-समय पर इसे लेकर चर्चा होती रहती है।

