पूणे

कीस्टोन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में 110 कॉपीराइट दर्ज किए

कीस्टोन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में 110 कॉपीराइट दर्ज किए

 

पुणे : कीस्टोन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के क्षेत्र में 110 कॉपीराइट्स दर्ज कराए हैं। इन कॉपीराइटेड कार्यों में शोध लेख, एआई-आधारित सॉफ्टवेयर कोड, विषयवार प्रेज़ेंटेशन स्लाइड्स, शैक्षणिक वीडियो, पोस्टर, कविताएँ और एआई पर आधारित ब्लॉग सम्मिलित हैं।

 

इन सभी कार्यों का संकलन एक विशेष पुस्तिका के रूप में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में लोकार्पित किया गया। इस लोकार्पण के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. संजय जी. धांडे (पूर्व निदेशक, आईआईटी कानपुर एवं वर्तमान कुलपति, अवंतिका विश्वविद्यालय, उज्जैन) थे। इस अवसर पर मिलिंद इनामदार, अध्यक्ष (President), Cyret Technologies ‘Guest of Honor’ के रूप में उपस्थित रहे।

 

डॉ. संजय धांडे ने संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि कीस्टोन संस्था शिक्षक एवं विद्यार्थियों को नवयुगीन प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रेरित कर आदर्श प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को रक्षा प्रौद्योगिकी (Defense Technology) में नवाचारपूर्ण सोच की आवश्यकता है और अभियांत्रिकी शिक्षा में इससे संबंधित विशेष कार्यक्रम आरंभ करने चाहिए। ऐसे प्रयास भारत की सामरिक एवं सुरक्षा क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

 

कीस्टोन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ. संदीप कदम ने कहा कि “तकनीक हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पूरे अभियांत्रिकी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। संस्था इस परिवर्तन का नेतृत्व करने को कटिबद्ध है।”

 

संस्थापक निदेशक प्रा. यशोधन सोमन ने बताया कि संस्था ‘Center of Excellence’, उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के ऑनर कोर्सेस के साथ-साथ Illinois Tech University (Chicago, USA) और Malaysia University of Science and Technology (Kuala Lumpur, Malaysia) सहित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ सहयोग कर रही है। इससे विद्यार्थियों को संयुक्त प्रशिक्षण, अनुसंधान और विकास के अवसर मिल रहे हैं।

 

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन प्रा. सुवर्णा फुले, प्रा. पंकज करांडे और प्रा. दीपाली मिसाळ ने किया। इस अवसर पर अंकित लुनावत, डॉ. प्रशांत कसबे, मिलिंद इनामदार सहित प्राध्यापक, कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

यह ऐतिहासिक उपलब्धि कीस्टोन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की शोध, नवाचार और तकनीक-आधारित शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। संस्था एआई और रक्षा प्रौद्योगिकी पर केंद्रित भविष्य निर्माण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

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