
मातृतुल्य येसूबाई और स्वातंत्र्यवीर सावरकर का भावस्पर्शी नाता उजागर
पुणे। “सागरा प्राण तळमळला” जैसी देशभक्ति से ओतप्रोत काव्यरचनाओं और स्वातंत्र्यवीर सावरकर की अमर कविताओं के साथ, बाबाराव, तात्याराव और येसूवहिनी के भावस्पर्शी संवादों तथा स्वगत कथनों से सावरकर और उनकी मातृतुल्य भावज येसूवहिनी के बीच पवित्र नाते का अद्भुत दर्शन हुआ। येसूबाई के हृदय में सावरकर के प्रति तेजस्वी भावनाओं को दर्शाते हुए हुए यह प्रसंग जब रंगमंच पर साकार हुआ, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
वंचित विकास संस्थान की ओर से आयोजित और समिधा पुणे द्वारा प्रस्तुत हृदयस्पर्शी सांगीतिक अभिवाचन “मी… येसूवहिनी” का 61वां प्रयोग नवीपेठ के निवारा सभागृह में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संगीता ठोसर के भावपूर्ण गीत, डॉ. चित्रलेखा पुरंदरे का यथार्थवादी लेखन, येसूबाई की भूमिका में वीणा गोखले, तात्याराव सावरकर की भूमिका में संजय गोखले और बाबाराव सावरकर की भूमिका में विनोद पावशे के प्रभावी अभिवाचन तथा दिलीप ठोसर के ओजस्वी निवेदन ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जहां असंख्य भारतीयों के मन में सावरकर के लिए अपार सम्मान और निष्ठा है, वहीं स्वयं सावरकर का प्रेरणास्थान कौन था और वे किसके प्रति आदरभाव रखते थे— इन प्रश्नों के उत्तर भी दर्शकों को मिले। सावरकर का तेजस्वी इतिहास सुनते समय कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
सावरकर ने विदेश से गुप्त रूप से क्रांतिकारियों को शस्त्र और साहित्य उपलब्ध कराया था। इंग्लैंड से भारत लौटते समय उन्हें गिरफ्तार किया गया, किंतु फ्रांस के मार्सेल बंदरगाह पर जहाज़ से भागने का उनका साहसी प्रयास आज भी इतिहास की स्मरणीय घटना है। अंडमान के सेल्युलर जेल में उन्होंने दस से अधिक वर्षों तक अमानवीय यातनाएँ सही, लेकिन मनोबल कभी नहीं खोया। जेल में रहते हुए भी वे साथियों को प्रेरित करते रहे, कविताएँ लिखीं और इतिहास, संस्कृति व राष्ट्रवाद पर गंभीर लेखन किया। सावरकर को आज न केवल क्रांतिकारी, बल्कि विचारक, समाजसुधारक और साहित्यकार के रूप में भी याद किया जाता है। उनके बचपन की देशभक्ति की चिंगारी ही आगे चलकर प्रखर ज्वाला बनी और भारत की स्वतंत्रता के आंदोलन को दिशा देने वाली ठहरी।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता योगेश गोगावले, दानदाता राजश्री पुजाधिकारी, लेफ्टिनेंट कर्नल भार्गव, वंचित विकास संस्थान की कार्यवाह एवं संचालिका मीना कुर्लेकर, संचालिका सुनीता जोगळेकर, देवयानी गोंगले, चैत्राली वाघ, मीनाक्षी नवले, तेजस्विनी थिटे, डॉ. श्रीकांत गबाले तथा जाणीव संगठन के संजय शंके सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।


