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राष्ट्रीय हस्तलिखित सर्वेक्षण अभियान में सहभाग का आह्वान

राष्ट्रीय हस्तलिखित सर्वेक्षण अभियान में सहभाग का आह्वान

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:  पुणे | महाराष्ट्र 

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी परियोजना ‘ज्ञानभारतम्’ के अंतर्गत देशव्यापी हस्तलिखित सर्वेक्षण अभियान 16 मार्च 2026 से प्रारंभ किया गया है। इसके तहत नागरिकों के पास उपलब्ध हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी ‘ज्ञानभारतम्’ मोबाइल ऐप पर अपलोड कर राष्ट्रीय अभियान में सहभाग दर्ज कराने का आह्वान किया गया है।

भारत की समृद्ध परंपरा में हस्तलिखित ग्रंथों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है, जिनके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होता आया है। हालांकि ये बहुमूल्य हस्तलिखित ग्रंथ विभिन्न स्थानों पर बिखरे हुए हैं। इन्हें एकत्र कर एक राष्ट्रीय ज्ञान भंडार के रूप में संरक्षित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘ज्ञानभारतम्’ परियोजना की शुरुआत की है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देशभर में उपलब्ध हस्तलिखित धरोहर का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार करना है। केंद्रीय बजट 2025 में घोषित इस योजना के तहत एक करोड़ से अधिक हस्तलिखित ग्रंथों की पहचान एवं पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह तैयार कर उसे देश-विदेश में उपलब्ध कराने की योजना है।

इस अभियान में हस्तलिखित ग्रंथों का स्वामित्व संबंधित संस्थानों, पुस्तकालयों अथवा निजी संग्राहकों के पास ही रहेगा। यदि स्वेच्छा से इन्हें सरकार को सौंपा जाता है तो उसे स्वीकार किया जाएगा।

महाराष्ट्र में इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभिन्न संस्थानों को क्लस्टर एवं स्वतंत्र केंद्र के रूप में शामिल किया गया है। इनमें कवी कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (नागपुर), भांडारकर प्राच्यविद्या अनुसंधान संस्थान (पुणे), आनंद आश्रम संस्थान (पुणे) एवं भारत इतिहास संशोधक मंडल (पुणे) शामिल हैं।

राज्य नोडल संस्था के रूप में पुरालेख संचालनालय, महाराष्ट्र (मुंबई) को नियुक्त किया गया है। सुजितकुमार उगले (संचालक, पुरालेख संचालनालय) राज्य नोडल अधिकारी तथा अंजलि ढमाल (उपसंचालक, मराठी भाषा विकास संस्थान) सह-नोडल अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

इस अभियान के लिए ‘ज्ञानभारतम्’ मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से हस्तलिखित ग्रंथों का क्षेत्रीय मूल्यांकन, सत्यापन एवं दस्तावेजीकरण किया जाएगा।

सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला नोडल अधिकारी की नियुक्ति, जिला स्तरीय समिति का गठन तथा मंदिरों, मठों, शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों एवं निजी संग्राहकों को इस अभियान से जोड़ने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, संस्कृत पाठशालाओं, शोधकर्ताओं, एनसीसी-एनएसएस स्वयंसेवकों तथा विद्यार्थियों से इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है।

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