शाश्वत विकास की दूरदर्शी जनचेतना :
“मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायती राज अभियान”
भारत एक कृषि प्रधान देश है और गाँव इसका प्राणकेंद्र। इसलिए गाँव की समस्याएँ हल किए बिना और उनका शाश्वत विकास किए बिना देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं। शाश्वत विकास वह है, जो वर्तमान पीढ़ी की ज़रूरतें पूरी करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण करता है। इसलिए गाँवों का शाश्वत विकास राज्य और राष्ट्र की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज भी अनेक गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली आपूर्ति जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के साथ–साथ उच्च स्तर की शिक्षा, आईटी सुविधाएँ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएँ और रोज़गार के अवसर जैसी ज़रूरतें बनी हुई हैं। इन्हें पूरा करने के लिए शासन बड़े पैमाने पर कार्य कर रहा है।
इसी पृष्ठभूमि पर राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायती राज अभियान” शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर 2025 को किया जाएगा। यह अभियान केवल प्रतिस्पर्धी नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामविकास को एक जनचेतना और लोकचळवळ का स्वरूप देने वाला होगा।
इस अभियान की संकल्पना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की है। 29 जुलाई 2025 को राज्य मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी और इसके लिए ₹290.33 करोड़ की व्यवस्था की। इसमें से ₹245.20 करोड़ पुरस्कारों के लिए और शेष प्रचार, प्रशिक्षण व मार्गदर्शन हेतु उपयोग किए जाएंगे।
अभियान का उद्देश्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गाँव–गाँव में सुशासन स्थापित करना, ग्रामस्थों में आत्मनिर्भरता लाना और विकास के लिए प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार करना है। यह योजना केवल प्रशासनिक तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामस्थों की सीधी भागीदारी पर आधारित है।
ग्रामविकास मंत्री जयकुमार गोरे के मार्गदर्शन में ठिबक सिंचाई, शेततलई, बंधारे, जलसंवर्धन, जलयुक्त शिवार जैसी योजनाएँ चल रही हैं। सेंद्रिय खेती को बढ़ावा, रासायनिक खादों का कम उपयोग, आवास योजनाएँ, महिलाओं को बचत समूहों के माध्यम से सशक्त बनाना, दुग्धोत्पादन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और कुक्कुट पालन जैसी योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर बल दिया जा रहा है। अभियान इन प्रयासों को प्रोत्साहन देगा।
अभियान के 7 प्रमुख घटक
सुशासनयुक्त पंचायत — पारदर्शी और लोकाभिमुख प्रशासन
सक्षम पंचायत — आर्थिक स्वावलंबन, CSR फंड और जनसहभागिता
जलसमृद्ध, स्वच्छ और हरित गाँव — पर्यावरण संरक्षण व जल प्रबंधन
योजनाओं का अभिसरण — मनरेगा व अन्य योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन
संस्था सक्षमीकरण — स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्रों की मज़बूती
उपजीविका विकास और सामाजिक न्याय — रोज़गार सृजन व महिला सशक्तिकरण
7. जनसहभागिता व श्रमदान — ग्रामस्थों की सीधी भागीदारी
विशेष रूप से सातवाँ घटक इस अभियान को जनचेतना का रूप देने वाला है, क्योंकि सीधे ग्रामस्थों के श्रमदान और भागीदारी से यह अभियान लोकचळवळ बनेगा।
पुरस्कार संरचना
कुल ₹245.20 करोड़ की राशि पुरस्कारों के लिए रखी गई है। 1902 सफल पंचायतों को पुरस्कार मिलेंगे।
राज्यस्तरीय पुरस्कार (ग्राम पंचायत)
प्रथम : ₹5 करोड़,द्वितीय : ₹3 करोड़,तृतीय : ₹2 करोड़
विभागीय स्तर (ग्राम पंचायत)
प्रथम : ₹1 करोड़,द्वितीय : ₹80 लाख,तृतीय : ₹60 लाख
जिलास्तरीय पुरस्कार (ग्राम पंचायत)
प्रथम : ₹50 लाख,द्वितीय : ₹30 लाख,तृतीय : ₹20 लाख
तालुका स्तर (ग्राम पंचायत)
प्रथम : ₹15 लाख,द्वितीय : ₹12 लाख ,तृतीय : ₹8 लाख
विशेष पुरस्कार : प्रत्येक तालुके की 2 ग्राम पंचायतों को ₹5 लाख
पंचायत समितियाँ और ज़िला परिषदें भी शामिल हैं
पंचायत समितियों के लिए राज्य स्तर पर 3 पुरस्कार (₹2 करोड़, ₹1.5 करोड़, ₹1.25 करोड़)।
विभागीय स्तर पर पंचायत समितियों को (₹1 करोड़, ₹75 लाख, ₹60 लाख)।
ज़िला परिषद के लिए राज्य स्तर पर (₹5 करोड़, ₹3 करोड़, ₹2 करोड़)।
कार्यान्वयन और मूल्यांकन
अभियान का कालावधी 17 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगा। मूल्यांकन 100 अंकों पर आधारित होगा। इसमें पारदर्शी प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, रोज़गार, पर्यावरण, कर वसूली और जनसहभागिता को मापदंड बनाया जाएगा।
प्रत्येक पंचायत को रोज़ाना रिपोर्ट मोबाइल ऐप और वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
अभियान से पहले राज्य, जिला और तालुका स्तर पर प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ होंगी। जनजागरूकता के लिए पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया, चित्रफीत और यशोगाथाओं का प्रयोग किया जाएगा।
शिक्षा और युवा सशक्तिकरण
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रगति की पहली सीढ़ी है। सक्षम युवा पीढ़ी बनाने के लिए गाँवों में डिजिटल क्लास, ई–लर्निंग, पुस्तकालय और कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएँगे। कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, बिजली, सिलाई, हस्तकला जैसे प्रशिक्षण से युवाओं को रोज़गार और उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे।
निष्कर्ष
“मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायती राज अभियान” केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण महाराष्ट्र के सामाजिक परिवर्तन की दिशा है। यदि प्रत्येक ग्रामस्थ सक्रिय रूप से इसमें भाग लेता है तो गाँवों का चेहरा बदलेगा और शाश्वत विकास संभव होगा। यह अभियान सचमुच एक दूरदर्शी लोकचळवळ सिद्ध होगा।
(किरण वाघ, विभागीय संपर्क अधिकार)


