पूणे

…अन्यथा बसपा सड़क पर उतरेगी

…अन्यथा बसपा सड़क पर उतरेगी!

राजस्व विभाग के भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त!

सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो ‘बसपा स्टाइल’ आंदोलन का बिगुल बजेगा

बसपा महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी की प्रशासन को चेतावनी

पुणे | विशाल समाचार 

 

महाराष्ट्र के प्रगतिशील कहलाने वाले राजस्व विभाग के भ्रष्टाचार ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। तलाठी–नायब तहसीलदार–तहसीलदार स्तर पर भ्रष्टाचार जनता की सहनशक्ति से बाहर हो चुका है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि किसानों, ग्रामीणों और शहरी जनता के साथ खुला अन्याय है।

 

सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो सड़क पर उतरकर ‘बसपा स्टाइल’ आंदोलन करेंगे, ऐसा इशारा प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने सोमवार (8 तारीख) को दिया। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग आम नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ा है। लेकिन सातबारा उतारा, फेरफार, आय प्रमाणपत्र, जाति सत्यापन, ज़मीन विवाद – इनमें से कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होता।

 

ग्रामीण क्षेत्रों में तो अधिकारी कार्यालय में दिखाई ही नहीं देते, यही आम लोगों की शिकायत है। किसानों को कर्जमाफी, फसल बीमा, पीएम किसान जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों को पैसे देने पड़ते हैं। यह बड़ी विडंबना है। भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने वाले नेताओं को जनता माफ नहीं करेगी। यह लड़ाई आम जनता के न्याय की है और इसे सड़क से ही लड़ा जाएगा, ऐसा डॉ. चलवादी ने स्पष्ट किया।

 

हर दिन हज़ारों किसान राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन अधिकारी जानबूझकर फाइल रोककर ‘खर्च’ मांगते हैं। तहसील कार्यालयों में दलालों का जाल बिछा हुआ है। जनता ठगी जाती है, किसान लुटते हैं और सरकार आँख मूँदकर देखती रहती है – इस पर डॉ. चलवादी ने कड़ी नाराज़गी जताई।

 

लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच राजस्व विभाग के खिलाफ 12,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 60% शिकायतें तलाठी–नायब तहसीलदार–तहसीलदार स्तर की थीं। केवल 2021–22 में ही राजस्व विभाग के 286 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 172 तलाठी और 58 नायब तहसीलदार थे। आम प्रमाणपत्रों के लिए औसतन 500 से 5,000 रुपए तक की रिश्वत ली जाती है, जबकि ज़मीन विवादों में लाखों की वसूली होती है।

 

सातबारा एकत्रीकरण के समय भी आवेदकों से खूब वसूली होती है। अपील सुनवाई का अधिकार नायब तहसीलदार, तहसीलदार, प्रांताधिकारी, अपर ज़िलाधिकारी, अतिरिक्त आयुक्त के पास होता है। लेकिन ये प्रकरण सालों-साल लंबित रखे जाते हैं। जो अपीलकर्ता मोटी रकम खर्च करते हैं, उन्हीं की अपील जल्दी निपटाई जाती है।

 

डॉ. चलवादी ने कहा – सरकार ने यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई कर पारदर्शी व्यवस्था नहीं लाई तो बहुजन समाज पार्टी जनता के साथ सड़क पर उतरकर तहसील कार्यालयों, राजस्व भवन और ज़िलाधिकारी कार्यालयों के सामने तीव्र आंदोलन करेगी।

 

बसपा ने माँग की है कि आम नागरिकों और किसानों से जुड़ा हर प्रमाणपत्र निर्धारित समय सीमा में न देने पर संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो। साथ ही, सभी राजस्व कार्यालयों में दलाली और रिश्वतखोरी पर तत्काल अंकुश लगाया जाए और ऑनलाइन सेवाओं को वास्तव में कारगर बनाकर जनता को राहत दी जाए।

 

 

शहर के नागरिकों के सातबारा रिकॉर्ड अक्सर ग़लत कर दिए जाते हैं और इस बहाने उनसे पैसे वसूले जाते हैं। कम्प्यूटरीकरण के दौरान जानबूझकर नाम और क्षेत्र ग़लत डाले जाते हैं, जिससे शहरी लोगों को मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।

छोटे-छोटे भूखंड ख़रीदने वालों पर ‘तुकडे़बंदी क़ानून’ या ‘84 क’ का दबाव डालकर उनसे वसूली की जाती है। जो रिश्वत देता है, उसे राहत दी जाती है। वतन की ज़मीनों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ चल रही हैं। ज़िलाधिकारी के आदेश के बिना ही भोगवटा वर्ग बदले जा रहे हैं। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और अदालतों के आदेशों को भी नज़रअंदाज़ किया जाता है, ऐसा आरोप डॉ. चलवादी ने लगाया।

 

 

✍️ विशाल समाचार जनता की आवाज़आपके साथ

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