
ड्रिप सिंचाई से बढ़ेगा उत्पादन, समृद्ध होंगे किसान-दिनेश प्रताप सिंह
किसानों की समृद्धि और जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा दे रही डबल इंजन सरकार
सिंचाई उपकरणों पर मिलेगा 90 फीसदी तक अनुदान
लखनऊ: विशाल समाचार
किसानों की मददगार डबल इंजन की सरकार निरंतर किसानों के हित में कार्य कर रही है। इसी क्रम में किसानों की समृद्धि एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु ड्रिप सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दे रही है। बागवानी फसलों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने से औसतन 50 प्रतिशत तक फसल उपज में वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसी प्रकार गन्ना जैसी प्रमुख नकदी फसल में भी ड्रिप तकनीक के प्रयोग से समान परिणाम सामने आए हैं। ये बातें प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कही।
श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में माइक्रोइरीगेशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 1.02 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल आच्छादन के सापेक्ष 82 हजार से अधिक कृषकों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से लाभान्वित किया गया है। यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, तकनीक के समुचित उपयोग तथा सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अधिक से अधिक किसानों को पर ड्रॉप मोर क्रॉप-माइक्रो इरीगेशन योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई पद्धति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ड्रिप सिंचाई के उपयोग व लाभ समझाने तथा उन्हें आवेदन प्रक्रिया में हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री बी.एल. मीणा ने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति से जल की 40 से 50 प्रतिशत तक बचत संभव है। साथ ही, यह तकनीक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पौधों को संतुलित पोषण उपलब्ध कराने और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड, भू-अभिलेख एवं बैंक खाता अनिवार्य है। लाभार्थी कृषक को अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि पर अनुदान अनुमन्य होगा, उसी भूमि पर 7 वर्ष पश्चात पुनः योजना के लाभ की व्यवस्था भी है। विशेषज्ञ अभियंता से सामग्री आगणन लेआउट व डिजाइन के तकनीकी परीक्षण की ऑनलाइन सुविधा है। ड्रिप, मिनी, माइक्रो स्प्रिंकलर के लाभार्थियों को बीमा की सुविधा भी मिलेगी।
इस योजना में ड्रिप, मिनी, माइक्रो स्प्रिंकलर पर लघु एवं सीमांत कृषकों को लागत का 90 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत अनुदान तथा पोर्टेबल, सेमी परमानेंट, रेनगन स्प्रिंकलर पर लघु एवं सीमांत कृषकों को लागत का 75 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 65 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अनुमन्य अनुदान में प्रदेश सरकार 20 से 35 प्रतिशत अतिरिक्त राज्यांश (टॉप अप) की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। योजना का लाभ उठाने के लिए ऐसे किसान पात्र होंगे, जिनके पास सिंचाई के लिए पानी का स्रोत उपलब्ध हो तथा लाभार्थी अंश वहन करने में सक्षम हों। साथ ही संविदा खेती (कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग) (न्यूनतम 7 वर्षों के लीज एग्रीमेंट की भूमि) पर भी यह सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेन्सी द्वारा सत्यापन की व्यवस्था है। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु पंजीकरण से लेकर अंतिम भुगतान तक के प्रत्येक स्तर पर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ट्रैकिंग तथा लाभार्थी कृषक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एस.एम.एस. की सुविधा उपलब्ध है। योजनार्न्तगत 129 निर्माता फर्में चयनित हैं एवं कृषक किसी भी पंजीकृत फर्म से कार्य कराने हेतु स्वतंत्र है। कृषकगण इस योजना का लाभ लेने के लिए www.uphorticulture.gov.in व www.upmip.in वेबसाइट पर विजिट करें। अधिक जानकारी के लिए जनपदीय उद्यान अधिकारी या मंडलीय उप निदेशक उद्यान से संपर्क कर सकते हैं।



