
म्यूज़ियम जाकर सीखने की प्रवृत्ति बच्चों में बढ़ानी चाहिए — डॉ. गो. बं. देगलूरकर
पुणे :“म्यूज़ियम ज्ञान का जीवंत स्रोत हैं, बच्चों में इन्हें देखने और सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए,” यह मत डेक्कन अभिमत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं मूर्तिशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. गो. बं. देगलूरकर ने व्यक्त किया। वे रसिक आंतरभारती द्वारा आयोजित संजय दाबके लिखित पुस्तक ‘म्यूज़ियम’ के प्रकाशन समारोह में बोल रहे थे।
कार्यक्रम शिवसृष्टी, आंबेगांव बुद्रुक में आयोजित हुआ, जिसमें दुर्ग अभ्यासक प्रा. प्र. के. घाणेकर, शिवसृष्टी के अध्यक्ष जगदीश कदम, लेखक संजय दाबके और शैलेश नांदुरकर उपस्थित रहे। दाबके ने यूरोप और अमेरिका के 13 प्रमुख म्यूज़ियम्स के अनुभव इस पुस्तक में साझा किए हैं।
प्रा. घाणेकर ने कहा कि महाराष्ट्र स्वयं किलों का जीवंत म्यूज़ियम है और माता-पिता को हर साल बच्चों को कम से कम एक म्यूज़ियम अवश्य दिखाना चाहिए। लेखक दाबके ने बताया कि आधुनिक तकनीक के प्रयोग से म्यूज़ियम अब और आकर्षक बन रहे हैं। शिवसृष्टी के अध्यक्ष कदम ने बताया कि 438 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही शिवसृष्टी में अगले दो वर्षों में रायगढ़ की राजसभा और राज्याभिषेक का अनुभव दर्शकों को मिलेगा।


