
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास – कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे
Reported by Vishal Sharmachar Web Desk | Pune Bureau
पुणे, ‘प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना’ का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, पूसा, नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र के नौ जिलों का चयन किया गया है।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से चयनित जिलों के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
प्रधानमंत्री द्वारा योजना के शुभारंभ के अवसर पर पुणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक सभागार में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री भरणे ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को नीति के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है, ताकि किसान सशक्त और सक्षम बन सकें।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष जून से सितंबर के बीच राज्य में अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं मंत्रिगणों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की समस्याएँ जानीं। किसानों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा 31,627 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई है।
इस पैकेज के अंतर्गत—
सूखी भूमि के लिए 18,500 रुपये प्रति हेक्टेयर,
हंगामी बागायती भूमि के लिए 27,000 रुपये प्रति हेक्टेयर,
बागायती भूमि के लिए 32,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
रबी फसल वाले क्षेत्रों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता देने का निर्णय भी लिया गया है।
राज्य में लगभग 3,500 कृषि सखियाँ कार्यरत हैं, जो स्वयं प्रशिक्षण प्राप्त कर स्थानीय महिला कृषकों को मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। श्री भरणे ने कहा कि “कृषि समृद्धि योजना” के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुँचाना, सेंद्रिय खेती को बढ़ावा देना और नई कृषि तकनीक अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि दलहन फसलों – चना, मूंग, तूर, उड़द एवं मसूर – के उत्पादन को प्रोत्साहन देकर देश को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। दलहन की खेती से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है और भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है। श्री भरणे ने किसानों से सूक्ष्म सिंचाई अपनाने तथा जैविक खाद के उपयोग का आह्वान किया।
कृषि आयुक्त सूरज मांढरे ने कहा कि किसानों ने उत्पादन तो बढ़ाया है, परंतु आय में समानुपातिक वृद्धि नहीं हुई। उत्पादित कृषि उपज का उचित मूल्य न मिलने से किसानों की आय प्रभावित होती है। इसलिए अब किसानों को अपनी उपज का मूल्य संवर्धन करने और विपणन में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सेंद्रिय खेती में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रगतिशील कृषकों का सम्मान किया गया। कुछ महिला कृषकों को उनके नाम सूची में न होने के बावजूद उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए कृषि मंत्री श्री भरणे ने मंच से ही पुरस्कृत किया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह का वातावरण बना।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक (जैविक) खेती पर आधारित तीन पुस्तिकाओं का प्रकाशन किया गया।
‘प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना’ में महाराष्ट्र के नौ जिलों का समावेश
इस योजना के अंतर्गत देश के 100 आकांक्षी जिलों का चयन किया गया है, जहाँ कृषि उत्पादकता, सिंचाई क्षमता और ऋण सुविधा की कमी पाई जाती है।
महाराष्ट्र के पालघर, रायगढ़, धुले, छत्रपति संभाजीनगर, बीड, नांदेड़, यवतमाल, चंद्रपुर एवं गडचिरोली जिलों को इसमें सम्मिलित किया गया है।
योजना का उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित 36 से अधिक योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से फसल उत्पादकता में वृद्धि, कृषि उत्पादन की स्थिरता सुनिश्चित करना, कटाई पश्चात तकनीकी सुधार एवं ऋण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है।
₹42 हजार करोड़ रुपये की कृषि योजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 42 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न कृषि योजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास किया। इनमें ‘प्रधानमंत्री धन–धान्य कृषि योजना’, दलहन आत्मनिर्भरता अभियान, कृषि अवसंरचना निधि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से संबंधित 1,100 से अधिक परियोजनाएँ सम्मिलित हैं।

