
ऐन दिवाली पर सरकार ने जनता का दिवाला निकाला! — डॉ. हुलगेश चलवादी
‘परिवहन विभाग’ को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने का समय आ गया है
पुणे :राज्य में जहाँ एक ओर दिवाली का उत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सामान्य जनता के लिए यह दिवाली आर्थिक दृष्टि से अत्यंत कष्टदायक सिद्ध हुई है। रोज़गार के उद्देश्य से विभिन्न नगरों में निवास करने वाले श्रमिकवर्ग एवं नौकरीपेशा नागरिक जब अपने गृह नगरों की ओर प्रस्थान करने लगे, तब उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूर्णतः अस्त-व्यस्त हो गई, जिसके परिणामस्वरूप निजी ट्रैवल्स संचालकों एवं वाहनचालकों ने यात्रियों से मनमाने किराये वसूल कर उनकी खुली लूट की। यह गंभीर आरोप बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र क्षेत्र के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवाड़ी ने लगाया है।
डॉ. चलवादी ने कहा कि राज्य सरकार तथा परिवहन विभाग को प्रतिवर्ष दिवाली के अवसर पर होने वाली भीड़ का पूर्वानुमान भलीभाँति होता है, तथापि यात्रियों की सुविधा हेतु पर्याप्त बसें अथवा रेलगाड़ियाँ उपलब्ध कराने में वे निरन्तर असफल सिद्ध हो रहे हैं। इस प्रशासनिक शिथिलता के कारण निजी ट्रैवल्स संचालकों ने टिकट दरों में दो से तीन गुना तक वृद्धि कर आम नागरिकों का आर्थिक शोषण किया।
राज्यभर में प्रत्येक वर्ष औसतन 25 से 30 लाख यात्री दिवाली के अवसर पर महानगरों से अपने गाँवों की ओर यात्रा करते हैं। किंतु इस वर्ष महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एमएसआरटीसी) ने केवल 3,800 अतिरिक्त बसें चलाईं, जो गत वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम हैं।
इस सीमित सेवा का दुष्परिणाम यह हुआ कि निजी ट्रैवल्स संचालकों ने टिकट दरों में बेहिसाब वृद्धि कर दी।
पुणे से नांदेड़, नागपुर, चंद्रपुर, कोल्हापुर, सांगली तथा औरंगाबाद जैसे प्रमुख मार्गों पर ₹800–₹1000 के टिकट ₹2500–₹3000 तक पहुँच गए।
कुछ स्थानों पर तो एक ही सीट के ₹4000 तक वसूले गए।
डॉ. चलवादी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा —
“प्रत्येक वर्ष यही स्थिति उत्पन्न होती है और सरकार मौन धारण कर लेती है। यदि परिवहन विभाग ने समय रहते समुचित योजना बनाई होती, तो यह परिस्थितियाँ टाली जा सकती थीं।”
उन्होंने राज्य सरकार से यह माँग की कि मुंबई–नागपुर, पुणे–नागपुर, मुंबई–कोकण तथा अन्य प्रमुख मार्गों पर विशेष रेलगाड़ियाँ एवं अतिरिक्त एस.टी. बस सेवाएँ तत्काल प्रारम्भ की जाएँ।
“दिवाली जैसे प्रमुख त्यौहारों में जनता की यात्रा-सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। परवडने योग्य किराये पर यात्रा-सुविधा प्रदान करना सरकार का दायित्व है,”
ऐसा मत व्यक्त करते हुए डॉ. चलवाड़ी ने सरकार की निष्क्रिय नीतियों पर तीव्र प्रहार किया।
अंत में उन्होंने चेतावनी दी —
“जब तक परिवहन नीति उत्तरदायी एवं कठोर रूप से लागू नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी स्थिति प्रतिवर्ष पुनः उत्पन्न होती रहेगी, और सरकार ही सामान्य
जनता का दिवाला निकालती रहेगी।”



