
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों आळंदी में विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शुभारंभ
इंद्रायणी नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक – उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
पुणे विशाल समाचार संवाददाता
पुणे: महाराष्ट्र के श्रद्धा स्थल देहू और आळंदी से होकर बहने वाली इंद्रायणी नदी भाविकों की आस्था का प्रतीक है। इसीलिए राज्य सरकार ने इंद्रायणी नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में सभी संबंधित विभागों को एकजुट होकर कार्य करने के निर्देश उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि हमारी आस्था से जुड़ा अभियान है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपना योगदान देना चाहिए।
आळंदी नगर परिषद की विशेष अनुदान योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन और शुभारंभ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों किया गया। इस अवसर पर मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत, रोजगार हमी मंत्री भरत गोगावले, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे, विधायक बाबाजी काले, आळंदी नगर परिषद के मुख्याधिकारी माधव खांडेकर तथा श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान के मुख्य विश्वस्त योगी निरंजननाथ उपस्थित रहे।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, “महाराष्ट्र संतों और वीरों की भूमि है। वारकरी समुदाय के हित में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं — जैसे वारकरी भवन निर्माण, दिंडियों के लिए अनुदान, वारकरी बीमा योजना आदि। मंदिर संस्कार केंद्र होते हैं, इसलिए ‘बी’ वर्ग तीर्थक्षेत्रों की निधि दो करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है।”
उन्होंने आगे बताया कि कार्तिकी वारी से पूर्व सड़कों की मरम्मत कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए नगर विकास विभाग से एक करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई है। सरकार वारकरी समुदाय के साथ मजबूती से खड़ी है और धर्म, परंपरा एवं संस्कृति का सम्मान करने वाली है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “आळंदी में ‘ज्ञानपीठ’ की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है और इसका अनुसरण जारी है। महाराष्ट्र गोमाता को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने वाला देश का पहला राज्य है। भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में महाराष्ट्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। आळंदी जलापूर्ति योजना को शीघ्र मंजूरी देकर कार्य आरंभ किया जाएगा। साथ ही, रुग्ण (स्वास्थ्य) जांच केंद्र के माध्यम से वारकरी सेवा को गति मिलेगी और भक्तनिवास का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।”
मंत्री उदय सामंत ने कहा कि “संत ज्ञानेश्वर महाराज की 750वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में मराठी भाषा विभाग ने ज्ञानेश्वरी पारायण ग्रंथ की छपाई के लिए एक करोड़ रुपये की निधि दी है। यह परियोजना केवल तीन महीनों में पूरी की गई है। पारायण ग्रंथ अब मात्र 50 रुपये में वारकरी भक्तों को उपलब्ध होगा। साथ ही, गोशाला के स्थानांतरण के लिए भी शासन प्रयासरत है।”
इस अवसर पर श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान भक्तनिवास, महाद्वार घाट सौंदर्यीकरण, बहुविशेषता अस्पताल का भूमिपूजन तथा “श्री ज्ञानेश्वरी ग्रंथ पारायण प्रत” का प्रकाशन और रुग्ण परीक्षण केंद्र का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों संपन्न हुआ। उन्होंने श्री ज्ञानेश्वर माऊली की समाधि का दर्शन कर घाट परिसर का निरीक्षण भी किया।
भक्तनिवास निर्माण के लिए सरकार ने कुल 25 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें से 10 करोड़ रुपये तत्काल जारी किए गए हैं। लगभग 9,813 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाली इस इमारत में 325 श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा होगी। कार्य पूर्ण होने के बाद यह भवन संस्थान समिति को संचालन हेतु हस्तांतरित किया जाएगा। वहीं महाद्वार घाट के सौंदर्यीकरण के लिए नगर विकास विभाग की ओर से 5 करोड़ रुपये की निधि स्वीकृत की गई है।
कार्यक्रम का संचालन एवं प्रस्तावना श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान के प्रमुख विश्वस्त योगी निरंजननाथ ने की। इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में वारकरी भक्त उपस्थित रहे।

