
सुनियोजित पुनर्विकास के लिए एकीकृत विकास आवश्यक — लोकमान्य नगर निवासी संघ का स्पष्ट रुख
म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साकोरे से मुलाकात कर एकीकृत पुनर्विकास को गति देने की मांग
पुणे: लोकमान्य नगर पुनर्विकास के मुद्दे पर भले ही इस समय राजनीतिक माहौल गर्म हो, लेकिन स्थानीय नागरिकों का पंजीकृत लोकमान्य नगर निवासी संघ वर्ष 2021 से ही एकीकृत (क्लस्टर) विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। आज संघ के पदाधिकारियों ने म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साकोरे से मुलाकात कर शासन की वर्तमान नीति के तहत एकीकृत पुनर्विकास प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की मांग की।
लोकमान्य नगर के अधिकांश निवासी एकीकृत पुनर्विकास के पक्ष में हैं और इसके लिए पूरा सहयोग देने को तैयार हैं। संघ की ओर से शासन से निवेदन किया गया कि शीघ्र निर्णय लेकर पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू की जाए। इस अवसर पर लोकमान्य नगर निवासी संघ के अध्यक्ष विनय देशमुख, सुनील शाह, विजय चव्हाण, विनायक देवळणकर, प्रवीण परशुरामी, प्रशांत मोहोळकर तथा अन्य सदस्य उपस्थित थे।
अध्यक्ष विनय देशमुख ने कहा, “लोकमान्य नगर निवासी संघ वर्ष 2021 से एकीकृत पुनर्विकास की मांग कर रहा है। हमारे क्षेत्र की अधिकांश इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, और बुनियादी सुविधाएँ जैसे सड़कें, पार्किंग, पानी की आपूर्ति और जलनिकासी बेहद खराब स्थिति में हैं। ऐसी स्थिति में क्लस्टर डेवेलपमेंट ही इस क्षेत्र के सुरक्षित और स्थायी विकास का सबसे उत्तम उपाय है।”
सुनील शाह ने कहा कि “लोकमान्य नगर का विकास केवल इमारतों के बदलाव का मामला नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा, सुविधाओं और जीवनस्तर सुधारने से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए यह पुनर्विकास राजनीति का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के भविष्य की आवश्यकता है।”
मुलाकात के दौरान महाराष्ट्र शासन की आवास नीति और नियमावली से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। संघ ने कहा कि परियोजना में 20% आर्थिक गारंटी, तीन वर्ष का अग्रिम किराया, तथा विकासक की आर्थिक पात्रता और विश्वसनीयता जैसी बातें गाळेधारकों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। संघ ने आग्रह किया कि म्हाडा इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे और पुनर्विकास प्रक्रिया को शीघ्र गति दे।


