भारत सरकार के सर्वे पर ममता बनर्जी बौखलाई — बोलीं, यह राज्यों के अधिकारों में दखल
विशाल समाचार | राष्ट्रीय डेस्क
भारत सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्तर के जन-कल्याण एवं सामाजिक आर्थिक सर्वे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गई हैं। सर्वे के निर्देश राज्य सरकारों को भेजे जाने के बाद ममता बनर्जी ने इसे राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों पर नियंत्रण करने की आदत हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सर्वे के नाम पर केंद्र सरकार राज्यों की स्वायत्तता कम करना चाहती है।
🔹 केंद्र का जवाब — “यह सर्वे नागरिक कल्याण और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण”
केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार यह सर्वे गरीबी रेखा, शिक्षा, नागरिक सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का वास्तविक डेटा एकत्र करने के लिए किया जा रहा है, ताकि योजनाओं के सीधे लाभ और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया कि सर्वे का उद्देश्य किसी भी राज्य की शक्तियों को कम करना नहीं, बल्कि विकास कार्यों को तेज और सटीक बनाना है।
🔹 बंगाल में राजनीतिक तापमान बढ़ा
ममता बनर्जी के विरोध के बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र बनाम राज्य सरकार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार सर्वे का बहाना बनाकर राज्य सरकारों में दखल देना चाहती है।
वहीं, भाजपा नेताओं का तर्क है कि पारदर्शिता से घबराने वाले लोग ही विरोध कर रहे हैं।
🔍 आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सर्वे में सहयोग नहीं करते तो
☑ ज़मीनी स्तर की योजनाओं का मूल्यांकन प्रभावित होगा
☑ डेटा संग्रहण धीमा पड़ेगा
☑ विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ेगा
जहाँ एक तरफ कुछ राज्य इस सर्वे का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्ष शासित राज्यों ने इसे राजनीतिक हथकंडा बताया है।
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