पूणे

असम की तर्ज पर अवैध प्रवासियों के खिलाफ अन्य राज्यों में भी कानून बने; नागरिक सोशल फाउंडेशन की मांग

असम की तर्ज पर अवैध प्रवासियों के खिलाफ अन्य राज्यों में भी कानून बने; नागरिक सोशल फाउंडेशन की मांग

 

पुणे: कानूनी एवं सामाजिक संस्था नागरिक सोशल फाउंडेशन ने देश में बढ़ती अवैध घुसखोरी की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संस्था के विधि विभाग ने असम राज्य में लागू “The Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950” का सखोल अध्ययन शुरू किया है। इसी के आधार पर अवैध विदेशियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार का कानून बनाने की मांग नागरिक सोशल फाउंडेशन के प्रीतम थोरवे ने महाराष्ट्र और गोवा के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर की है।

 

असम में इस कानून के माध्यम से अवैध विदेशी नागरिकों पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए फरवरी 2025 तक लगभग 30,000 से अधिक अवैध प्रवासियों को देश से बाहर किया गया, जबकि हाल के महीनों में 300 से 500 विदेशियों को “पुष बैक” कार्रवाई के तहत सीमा पार भेजा गया है। इन कार्रवाइयों के कारण राज्य की सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन और जनसंख्या संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।

 

इस विषय पर नागरिक सोशल फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट मंजिरी जोशी अध्ययन कर रही हैं। उनके अनुसार, भारत के अन्य राज्यों को भी ऐसे कानून बनाने की अनुमति मिलनी चाहिए, जिससे न्यायालयीन विलंब से बचते हुए स्थानीय प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हों।

 

नागरिक सोशल फाउंडेशन वर्तमान में संविधान के अनुरूप और न्यायालय में टिकाऊ ऐसा SOP और ड्राफ्ट एक्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। संस्था का कहना है कि—

 

“यदि राज्य और केंद्र सरकार हमें अधिकृत समय व सहयोग दें, तो हम प्रत्येक राज्य के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा प्रस्तुत कर सकते हैं।”

 

संस्था के अनुसार, अवैध प्रवासन से देश के संसाधनों, रोजगार के अवसरों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर दुष्परिणाम पड़ रहे हैं। इसलिए असम की तरह प्रत्येक राज्य को प्रशासनिक अधिकारों का उपयोग कर त्वरित कार्रवाई करने की शक्ति मिलनी चाहिए— ऐसा आग्रह नागरिक सोशल फाउंडेशन

ने किया है।

 

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