
पंडित विनायक तोरवी के गायन से ‘सूर महती महोत्सव’ के पहले दिन का समापन
पुणे, : ग्वालियर और किरणा घराने के वरिष्ठ शास्त्रीय गायक पंडित विनायक तोरवी के सुरांनी ‘सूर महती महोत्सव’ के पहले दिन का भव्य समापन हुआ। महोत्सव का यह तीसरा वर्ष है और इसका आयोजन स्वारगेट स्थित नेहरू स्टेडियम के समीप गणेश कला क्रीड़ा मंच में किया जा रहा है।
महोत्सव के उद्घाटन दिन प्रमुख प्रायोजक और अतिथि के रूप में इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट के शैक्षणिक सलाहकार चेतन वाकलकर, डॉ. हरी सहस्त्रबुद्धे, सूर महती फाउंडेशन के रवींद्र और मानसी खांडेकर, अतुल खांडेकर तथा भक्ति खांडेकर उपस्थित थे। महोत्सव को इंदिरा ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट, एसबीआई, विलास जावडेकर डेव्हलपर्स, सुमा और एलआईसी का मुख्य प्रायोजन प्राप्त हुआ है।
पंडित विनायक तोरवी ने इस अवसर पर डॉ. वीणा सहस्त्रबुद्धे को स्मरण करते हुए कहा कि “डॉ. सहस्त्रबुद्धे एक उमदा व्यक्तित्व आणि देशातील श्रेष्ठ कलाकारांपैकी एक होत्या।”
पहले दिन के दूसरे सत्र का समापन पंडित तोरवी के गूढ आणि भावपूर्ण गायनाने हुआ। उन्होंने राग छायानट में प्रस्तुति देते हुए ‘अब गुंद लाओ रे माननियां…’ जैसी पारंपरिक रचना गाई। उसके बाद ‘पल पल सोच विचार करूं मैं…’, तथा ‘घर जाने दे अब मोरे मन बसियां…’ जैसी बंदिशें प्रस्तुत कीं। समापन उन्होंने ‘चिदंबर राया ब्रह्मांड नायका…’ और ‘देव माझा, मी देवाचा…’ जैसे भक्तिमय अभंगों से किया।
संगत में भरत कामत (तबला), सुयोग कुंडलकर (संवादिनी), दत्तात्रय वेलणकर और धनंजय हेगडे (तानपुरा) यांनी साथ दिया।
महोत्सव का संचालन स्वानंद पटवर्धन ने किया।

